मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप केवल एक महान योद्धा नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान, त्याग और अदम्य साहस के जीवंत प्रतीक हैं। उनका जीवन आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री बुधवार को भोपाल में आयोजित महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी अपने स्वाभिमान और मातृभूमि के सम्मान से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज समाज का हर वर्ग उन्हें आदर्श पुरुष के रूप में स्मरण करता है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का 72 किलो वजनी कवच और 80 किलो का भाला उनके अद्वितीय पराक्रम और शारीरिक सामर्थ्य का प्रमाण है। डॉ. यादव ने चेतक और महाराणा प्रताप के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निष्ठा, समर्पण और साहस की ऐसी गाथा है, जो पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहेगी।
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महाराणा प्रताप लोक का निर्माण जल्द होगा पूरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है और इसी के माध्यम से राज्य स्तरीय जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि महाराणा प्रताप लोक के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाएगा। साथ ही पर्यटन विकास बोर्ड और कल्याण बोर्ड के माध्यम से महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास और योगदान को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा।
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युवाओं को मिलेगी सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को सेना और पुलिस जैसी सेवाओं में अधिक अवसर दिलाने के लिए राज्य सरकार ने “पार्थ योजना” शुरू की है। इसके तहत युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे भर्ती परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। डॉ. यादव ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने महापुरुषों के जीवन से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को शामिल किया जा रहा है, ताकि बच्चों में राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की भावना विकसित हो सके।
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विरासत से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर नई पहचान बना रहा है। मध्यप्रदेश भी “विरासत से विकास” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महापुरुषों की स्मृतियों के संरक्षण और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला और एकमात्र राज्य है, जिसने महाराणा प्रताप जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना, विक्रमादित्य महानाट्य के आयोजन तथा शोधार्थियों को फैलोशिप जैसी योजनाओं के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उज्जैन में मां क्षिप्रा के तट पर वीर शहीद दुर्गादास राठौर का भव्य संग्रहालय तैयार किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
