अराइज एवं अवे फाउंडेशन समिति के संचालक ने पत्र में कहा कि संस्था दो फरवरी 2025 से अस्पताल में अति गंभीर मरीजों के लिए भोजन उपलब्ध करा रही है, जिसके एव …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 16 Jun 2026 01:51:42 PM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jun 2026 01:54:10 PM (IST)

ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी में कैंटीन का 'गजब खेल': जांच शुरू होते ही ठेकेदार को याद आई मंदी, रातों-रात छोड़ा काम
सोशल मीडिया।

HighLights

  1. नौ जून को ठेकेदार ने दिया था आवेदन
  2. 10 जून को अनुबंध निरस्त करने का आदेश जारी
  3. दो साल का था अनुबंध, चार महीने में ही टूटा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कालेज में गजब का खेल चल रहा है। जब तक लोकायुक्त और डीएमई की जांच का डंडा नहीं चला था, तब तक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कार्डियोलॉजी विभाग में गंभीर मरीजों को डाइट चार्ट के अनुसार भोजन परोसा जाता रहा। लेकिन जैसे ही ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन दिए गए टेंडर व अन्य गड़बड़ियों की जांच शुरू हुई अचानक ठेकेदार को वैश्विक मंदी और अत्यधिक महंगाई का अहसास हुआ और नौ जून को ठेका छोड़ने का पत्र जीआरएमसी प्रबंधन को दे दिया।

अराइज एवं अवे फाउंडेशन समिति के संचालक ने पत्र में कहा कि संस्था दो फरवरी 2025 से अस्पताल में अति गंभीर मरीजों के लिए भोजन उपलब्ध करा रही है, जिसके एवज में प्रति मरीज 175.90 रुपये का भुगतान किया जाता है। वर्तमान महंगाई और मरीजों की डाइट के अनुरूप विशेष भोजन तैयार करने की अनिवार्यता के कारण इस राशि में भोजन उपलब्ध कराना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है।

संचालक ने बढ़ती लागत और अपर्याप्त भुगतान न होने का हवाला देते हुए अनुबंध समाप्त करने की मांग की थी। इसके अगले ही दिन 10 जून को अधिष्ठाता कार्यालय ने समिति के साथ भोजन प्रदायगी और कैंटीन संचालन का अनुबंध निरस्त कर दिया। साथ ही आदेश जारी कर जेएएच की शासकीय किचन से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कार्डियोलॉजी विभाग के मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर दी।

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ऑफलाइन ठेके पर पहले से उठ रहे थे सवाल

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कैंटीन संचालन का ठेका ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया के बजाय ऑफलाइन दिए जाने को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। पारदर्शिता को लेकर उठी आपत्तियों के बीच यह मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा। अब ठेका निरस्त होने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत थी तो अनुबंध इतनी जल्दबाजी में क्यों समाप्त किया गया। बताते हैं कि शर्त दस के अनुसार अनुबंध दो साल तक प्रभावशील था।



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