मध्य प्रदेश में कैंसर की समय रहते पहचान और इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत अब राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी महिलाओं के ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओरल जैसे तीन प्रमुख कैंसर की प्रारंभिक जांच और स्क्रीनिंग की सुविधा शुरू की जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में कैंसर रजिस्ट्री बोर्ड के गठन की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है, जिससे कैंसर मरीजों का सटीक, विश्वसनीय और व्यवस्थित डेटा तैयार किया जा सकेगा।

एनएचएम की प्रबंध संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि इन तीनों कैंसर को ध्यान में रखते हुए एक स्पष्ट और चरणबद्ध कार्ययोजना बनाई गई है। शुरुआती चरण में उन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को चुना गया है, जहां महिला चिकित्सा अधिकारी पदस्थ हैं। डॉ सिडाना ने बताया कि इसका उद्देश्य महिलाओं की जांच पूरी गरिमा, विश्वास और गोपनीयता के साथ सुनिश्चित करना है।फिलहाल यह सुविधा उन्हीं केंद्रों पर शुरू की जा रही है, जहां महिलाओं की प्राइवेसी बनाए रखना संभव है। उन्होंने कहा कि हर संभावित व्यक्ति की हर पांच साल में स्क्रीनिंग करना लक्ष्य है। अब यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर हो सकेगी।

समय पर जांच न कराना अब नहीं बनेगा बाधा

डॉ. सिडाना ने कहा कि कई महिलाएं लक्षण महसूस करने के बावजूद सामाजिक झिझक या जांच केंद्र की दूरी के कारण सामने नहीं आ पातीं। अब यह परेशानी काफी हद तक दूर होगी। प्रारंभिक जांच नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में ही हो सकेगी और यदि किसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं तो मरीज को तुरंत सेकेंडरी ट्रीटमेंट के लिए रेफर किया जाएगा। इससे कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में ही हो सकेगी और इलाज अधिक प्रभावी होगा।

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जिला स्तर पर ही होगा प्री-कैंसर का इलाज

सरकार की योजना केवल जांच तक सीमित नहीं है। सभी जिला चिकित्सालयों में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी माइनर लीजन को हटाने के लिए थर्मल एब्लेशन डिवाइसेज उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे कई प्री-कैंसरस मामलों का इलाज जिला स्तर पर ही संभव हो सकेगा और मरीजों को रेडिएशन या बड़ी सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाओं से बचाया जा सकेगा। गंभीर मामलों में मरीजों को हायर सेंटर्स पर भेजा जाएगा, जहां मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के साथ कीमोथेरेपी और फॉलो-अप की समुचित व्यवस्था होगी।

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कैंसर मरीजों का डाटा होगा एक जगह

कैंसर रजिस्ट्री बोर्ड को लेकर डॉ. सिडाना ने स्वीकार किया कि फिलहाल प्रदेश में कैंसर मरीजों का कोई ठोस और समग्र डेटा उपलब्ध नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए रजिस्ट्री बोर्ड के गठन की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं की निगरानी आसान होगी, बल्कि इलाज की रणनीति और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। फिलहाल यह पहल कुछ चुनिंदा स्थानों पर शुरू की गई है, जहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन आने वाले समय में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। विशेषज्ञों के सहयोग से यह व्यवस्था गांव-गांव तक पहुंचेगी और कैंसर की समय पर पहचान व इलाज को मध्य प्रदेश में मजबूत आधार मिलेगा।

 



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