इस ग्रुप की खोज सबसे पहले 1952 में मुंबई (तब बाम्बे) में हुई थी। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 01:53:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 01:55:18 PM (IST)

इंसानियत की मिसाल: अनजान की जान बचाने ग्वालियर से जयपुर पहुंचा दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप', ऑर्गन फेल्योर से बचे अली मोहम्मद
प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. विश्व रक्तदान दिवस आज
  2. 10 हजार लोगों में से सिर्फ एक में मिलने वाला खून
  3. Bombay Blood Group Gwalior To Jaipur, Rare Bombay Blood Group Saving Life, E Raktkosh Portal Blood Tracker

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जयपुर में भर्ती अली मोहम्मद को ग्वालियर से ‘बाम्बे ब्लड ग्रुप’ पहुंचा, जिससे उनके आर्गन फेल्योर होने से बच गए। यह ब्लड ग्वालियर के इमरजेंसी ब्लड सेंटर ने उपलब्ध कराया। यह सबसे दुर्लभ पाया जाने वाला ग्रुप है। एक रिसर्च के अनुसार यह ग्रुप भारत में प्रति 10 हजार लोगों में से एक व्यक्ति में पाया जाता है। इस ग्रुप की खोज सबसे पहले 1952 में मुंबई (तब बाम्बे) में हुई थी। आज विश्व रक्तदान दिवस पर पढ़िए इंसानियत से भरी ये रिपोर्ट…

ई-रक्तकोष पोर्टल से पता चला

अली के भतीजे इरफान ने बताया कि हम लोग बीकानेर से हैं, जब वहां चाचा का सही इलाज नहीं हो सका, तब हम लोग जयपुर पहुंचे। वहां हीमोग्लोबिन पांच प्वाइंट निकला, तब जांच के बाद इस दुर्लभ ग्रुप का पता चला। केंद्र सरकार के ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल की मदद से ग्वालियर के ब्लड सेंटर में इस ग्रुप के होने का पता चला, अब यह ब्लड चाचा को चढ़ चुका है। आगे के इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के हास्पिटल में भर्ती कराया है।

क्यों नहीं चढ़ाया जा सकता किसी और ग्रुप का खून?

चिकित्सकों के अनुसार सामान्य तौर पर ‘ओ निगेटिव’ को यूनिवर्सल डोनर माना जाता है, लेकिन बाम्बे ब्लड ग्रुप के मामले में यह नियम काम नहीं करता। इस ग्रुप के लोगों के शरीर में ‘एच एंटीजन’ (वह बुनियादी तत्व जिससे ए, बी और सी ग्रुप बनते हैं) नहीं होता।

इस वजह से उनका शरीर किसी भी दूसरे ब्लड ग्रुप (यहां तक कि ओ निगेटिव भी) को स्वीकार नहीं करता और उसे दुश्मन मानकर नष्ट करने लगता है। बाम्बे ब्लड ग्रुप वाले मरीज को केवल बाम्बे ब्लड ग्रुप का ही खून चढ़ाया जा सकता है।

‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल ने निभाई अहम भूमिका

इस पूरे रेस्क्यू आपरेशन में केंद्र सरकार के ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल ने बेहद अहम भूमिका निभाई। इस सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफार्म की मदद से कोई भी आम नागरिक या अस्पताल तुरंत यह लाइव ट्रैक कर सकता है कि किस अधिकृत ब्लड सेंटर में कौन सा ब्लड ग्रुप और कितनी यूनिट स्टाक उपलब्ध है। जब जयपुर के मरीज के लिए इस अत्यंत दुर्लभ ग्रुप की जरूरत पड़ी, तब इस पोर्टल और इमरजेंसी ब्लड सेंटर के लाइव डेटा नेटवर्क की मदद से ही स्टाक और एक्टिव रेयर डोनर्स की लोकेशन को तुरंत ट्रेस करना मुमकिन हो पाया।

मई माह में हमारे यहां एक्सचेंज में यह अत्यंत दुर्लभ ‘बाम्बे ब्लड ग्रुप’ आया था। उसकी जानकारी हमने केंद्र सरकार के ई-रक्तकोष पोर्टल पर डाल रखी थी। दो दिन पहले ही हमारे पास जयपुर से आवश्यकता सामने आई। तब हमने यह ब्लड मरीज के परिजन को उपलब्ध करा दिया। यह बहुत ही दुर्लभ ग्रुप है या कहा जाए कि यह किस्मत से ही मरीजों को मिल पाता है। -डॉक्टर सत्या साव, मेडिकल आफिसर, इमरजेंसी ब्लड बैंक।



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