भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। अभिलेखागार के उस विशेष कक्ष का ताला टूटा मिला है, जिसमें भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान के परिवार से जुड़े दुर्लभ और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित रखे गए थे। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कक्ष से कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या ऐतिहासिक सामग्री चोरी हुई है या नहीं।
जानकारी के अनुसार, उक्त दस्तावेजों को कुछ वर्ष पूर्व भोपाल जिला न्यायालय के आदेश पर राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षित रखवाया गया था। इन दस्तावेजों के चोरी होने अथवा गायब किए जाने की आशंकाओं के चलते इन्हें विशेष सुरक्षा के बीच संरक्षित किया गया था। अब उसी कक्ष में सेंध लगने की घटना ने ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
क्राइम ब्रांच के रिकॉर्ड से किया जाएगा मिलान
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अभिलेखागार में रखी सामग्री का मिलान भोपाल क्राइम ब्रांच के पास सुरक्षित रिकॉर्ड और सूची से कराया जाएगा। इसी आधार पर यह तय हो सकेगा कि कोई दुर्लभ दस्तावेज, पत्राचार या ऐतिहासिक वस्तु गायब हुई है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त सामग्री का पूरा विवरण और सूची पहले से क्राइम ब्रांच के पास सुरक्षित है।
कोतवाली एसीपी चंद्रशेखर पांडेय ने बताया कि अभिलेखागार परिसर में रहने वाले कर्मचारी दिनेश रायकवार ने एक कक्ष का ताला टूटा होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर श्यामला हिल्स थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एफएसएल ने मौके से जुटाए साक्ष्य
घटनास्थल पर एफएसएल टीम ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मौके का निरीक्षण किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ताला तोड़ने के पीछे मकसद चोरी था या किसी विशेष दस्तावेज तक पहुंच बनाना।
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मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसी कक्ष में वर्ष 2020 में क्राइम ब्रांच द्वारा जब्त की गई ऐतिहासिक सामग्री सुरक्षित रखी गई थी। उस समय गुजरात ले जाए जा रहे एक ट्रक से भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान के परिवार से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, निजी पत्राचार और कई ऐतिहासिक वस्तुएं बरामद की गई थीं। बाद में जिला न्यायालय के निर्देश पर यह पूरी सामग्री संरक्षण के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दी गई थी।
ताला टूटने की घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और क्या किसी ने सुनियोजित तरीके से इन बहुमूल्य दस्तावेजों तक पहुंचने का प्रयास किया है। पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हैं।
