राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए कांग्रेस पर जानबूझकर आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीनों प्रत्याशियों के नामांकन वैध पाए गए हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन आवश्यक जानकारी छिपाने के कारण निरस्त हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को इसके लिए जनता से माफी मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसा कि आप सभी जानते हैं, कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी छिपाई थी, जबकि उसे घोषित किया जाना चाहिए था। लेकिन, दुर्भाग्यवश कांग्रेस के लोगों ने यह जानकारी छिपाई। जो निर्णय लिया गया है, मैं इस जांच प्रक्रिया का स्वागत करता हूं। अब कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। सीएम डॉ.यादव ने कहा कि कांग्रेसी भय में थे। हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं।

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सीएम डॉ. यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसकी प्रत्याशी ने सुनियोजित तरीके से न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी छिपाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी आपराधिक या न्यायालयीन मामले की जानकारी छिपाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ छल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी प्रत्याशी को अपने खिलाफ चल रहे मामले की जानकारी है और इसके बावजूद वह शपथ पत्र में उसका उल्लेख नहीं करता है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से इस मामले में जनता से माफी मांगने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की। 

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कांग्रेस ने मतदाताओं को गुमराह करने का प्रयास किया : खंडेलवाल

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी छिपाकर मतदाताओं को गुमराह करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायालय से समन मिलने और जवाब प्रस्तुत करने के बाद भी यदि जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी गई, तो यह गंभीर चूक है। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन अधिकारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्णय लिया है। खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी की ओर से नामांकन जांच के दौरान आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पूरे मामले की पड़ताल हुई। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जुड़ा फैसला बताया। 

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कांग्रेस चुनौती देने की तैयारी में

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि निर्वाचन अधिकारी के फैसले से चुनाव प्रक्रिया को विवादित होने से बचाया गया है। वहीं, कांग्रेस इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। ऐसे में अब सबकी निगाहें आगे की कानूनी और चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। फिलहाल राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के नामांकन वैध हैं। हालांकि, चुनाव की अंतिम स्थिति नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



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