मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य स्तर पर स्टेट असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (सैक) गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला वर्ष “युवा वर्ष” होगा, इसलिए उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य संबंधित विभाग विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और योजनाओं की तैयारी करें। मंत्रालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार नए महाविद्यालय खोले जाएं। जिन कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां सुबह और शाम की शिफ्ट में कक्षाएं संचालित करने पर भी विचार किया जाए। उन्होंने रोजगार परक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने कृषि शिक्षा को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि प्रदेश में 20 हजार से अधिक विद्यार्थी कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों से जुड़े हैं। इसके लिए उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को बधाई दी। बैठक में विभाग की उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन (एविएशन) बीबीए पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। प्रदेश में वर्तमान में 384 शोध केंद्र संचालित हैं और आने वाले समय में 100 नए शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर नए कोर्स शुरू किए जाएं। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश ने स्वयं पोर्टल पर पंजीयन के मामले में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं “वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन” पोर्टल का उपयोग करने में भी प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था करने, पार्ट टाइम कॉलेज शुरू करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सांदीपनि विद्यालयों के भवनों में भी महाविद्यालय संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, नई तकनीकों का उपयोग और रोजगार आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
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सीएम ने यह निर्देश भी दिए-
– महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रोजगार परक पाठ्यक्रम के संचालन पर जोर हो।
– पार्ट टाइम महाविद्यालय संचालित किए जाएं। प्रातः और शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाए जा सकते हैं।
– आवश्यकता के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों के भवन में भी महाविद्यालय संचालित करें।
– कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को काउंसलिंग की भी व्यवस्था हो।
– खाद्य प्रसंस्करण,आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान सहित अन्य वोकेशनल विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की जाए।
