इंदौर में जलसंकट की स्थिति गंभीर होने लगी है और जनप्रतिनिधियों को भी जनता कोस रही है। पिछले दिनों विधायक महेंद्र हार्डिया ने जलसंकट के मुद्दे पर नाराजगी जताई थी। अब जलसंकट से निजात पाने के लिए मेयर पुष्य मित्र भार्गव, कलेक्टर और निगमायुक्त ने गुरुवार को विधायकों के साथ बैठक ली। ज्यादातर विधायकों ने टैंकरों से टंकियां भरने का विरोध किया। अन्य विधायकों ने भी अपनी राय व्यक्त की और सुझाव दिए।

 

विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि शहर में नल कम दबाव से आ रहे हैं। पानी की टंकियों से टैंकर भरने से टंकियां खाली हो रही हैं। नगर निगम को नए हेडिंग बनाना चाहिए। जल वितरण के प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि सुबह नल आने के समय लोग पंप लगाकर पानी खींचते हैं। सुबह आधे घंटे बिजली कटौती होगी तो 30 प्रतिशत समस्या हल हो जाएगी। वर्मा ने कहा कि नगर निगम जल वितरण का काम देख चुके पुराने अफसरों के अनुभव का भी लाभ उठाए। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि नया पानी तो नहीं लाया जा सकता। जितना पानी नर्मदा नदी से आ रहा है, उसी का ठीक से वितरण करना होगा।

उन्होंने कहा कि हम सांसद निधि से बोरिंग कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन उसका मेंटेनेंस होना चाहिए। विधायक गोलू शुक्ला ने कहा कि पानी की समस्या से जनता को निजात दिलाने के लिए वे क्षेत्र में 50 ट्यूबवेल विधायक निधि से करवा रहे हैं। जनता को समान रूप से पानी मिलना चाहिए।

विधायक महेंद्र हार्डिया और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भी अपनी बात रखी। विधायकों ने यह भी कहा कि कई लोग नगर निगम में टैंकर लगाने के लिए राजी नहीं रहते हैं। उनका भुगतान रुका पड़ा है। इस पर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि हाल ही में तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। विधायकों ने कहा कि जलसंकट की चिंता फरवरी माह से ही शुरू कर उसके हिसाब से प्लानिंग करनी चाहिए। अफसरों को जल यंत्रालय के साथ दूसरे काम भी दे रखे हैं। इस कारण वे जल प्रबंधन पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

 

तबीयत खराब होने के कारण मिश्रा नहीं आ पाए

इस बैठक में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी आने वाले थे, लेकिन बीमार होने के कारण उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। इस कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। दिल संंबंधी समस्या के कारण उन्हें विशेष अस्पताल में भर्ती किया गया है।

नौकरी-धंधे छोड़ पानी की चिंता करने लगे लोग

पानी के लिए कई लोग परेशान हो गए हैं। ज्यादा स्थिति बस्तियों में खराब है, जहां लोग सार्वजनिक नलों और टंकियों से पानी भरते हैं। वहां टंकियां खाली हो रही हैं और लोगों को नौकरी-धंधे छोड़कर पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कोई सुबह सब्जी बेचने से पहले ठेले पर केन ला रहा है, तो कोई ऑटो रिक्शा में यात्री बैठाने के बजाय केन से पानी भरने टंकियों पर जा रहा है। पालदा क्षेत्र के बाबूलाल नगर में दस दिन से नल नहीं आ रहे हैं। लोग पानी के टैंकरों के इंतजार में दिनभर बैठे रहते हैं। इसी इलाके में एक रिक्शा चालक रिक्शा में पानी ढोता नजर आया। अब तो पानी की टंकियों पर भी कतारें लगने लगी हैं।



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