धार भोजशाला को मंदिर का दर्जा मिलने के बाद अब हाईकोर्ट में केस लगाने वाले याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षक को पत्र लिखकर सर्वे में मिली मूर्तियों को फिर से भोजशाला में स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि धार में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं, स्थापत्य अवशेष एवं हिन्दू धार्मिक महत्व की सामग्री प्राप्त हुई है।

वे अवशेष इस तथ्य के प्रमाण हैं कि भोजशाला प्राचीन काल से हिन्दू आस्था और मां वाग्देवी की आराधना का प्रमुख केंद्र रही है। ये प्रतिमाएं सुरक्षित रूप से अलग रखी गई हैं, लेकिन हिन्दू समाज चाहता है कि उन प्रतिमाओं को फिर से भोजशाला परिसर में विधिवत स्थापित किया जाए ताकि श्रद्धालु उनके दर्शन और पूजन कर सकें।

 

गोयल ने कहा कि वर्तमान में मांडू और धार संग्रहालय में जो प्रतिमाएं सुरक्षित रखी गई हैं, उन्हें फिर वापस लाकर भोजशाला परिसर में उचित स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए। कुछ प्रतिमाएं भोजशाला परिसर में भी सुरक्षित रखी गई हैं। उन्हें भी फिर भोजशाला के भीतर लाया जाए। श्रद्धालुओं को प्रतिमाओं के नियमित दर्शन और पूजन की अनुमति प्रदान की जाए।

आपको बता दें कि एएसआई ने भोजशाला में 98 दिनों तक सर्वे किया था और खुदाई में कई हिन्दू चिन्ह और प्रतिमाएं मिली थीं। इसका उल्लेख अधिकारियों ने अपनी दो हजार पृष्ठों की रिपोर्ट में किया है। भोजशाला के एक हिस्से में कई टूटे अवशेष बंद ताले में रखे गए हैं। इसके अलावा, मांडू के संग्रहालय में भी कुछ मूर्तियां रखी गई हैं।



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