पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में रविवार को न्याय की मांग को लेकर परिजन मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा के पिता, भाई और अन्य परिजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास पर जमकर हंगामा किया। मौके पर श्यामला हिल्स थाना पुलिस बल, थाना प्रभारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा और भाई मेजर हर्षित शर्मा को मिलने के लिए बुलाया गया।
सीएम से मुलाकात के बाद ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई, जिसमें अधिकारियों ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बाहरी एजेंसी से जांच की जरूरत हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराना भी जरूरी माना है। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया कि न्यायपालिका स्वतंत्र संस्था है और सरकार न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया गया है। नवनिधि शर्मा ने कहा कि आरोपी खुद न्यायिक व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जबकि दूसरी ओर आरोपियों ने तुरंत अग्रिम जमानत हासिल कर ली।
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परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में महिला थाने ने जीरो एफआईआर लेने से भी इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद 15 मई की रात केस दर्ज किया गया। परिवार ने यह भी कहा कि ट्विशा की मौत की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई, जबकि पुलिस और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी थी कि परिवार को तुरंत सूचना दी जाती। जांच प्रक्रिया को लेकर भी परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पर्याप्त समय दिया, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी बने
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी परिजनों ने भरोसा नहीं जताया है। उनका कहना है कि जांच उन्हीं अधिकारियों के दायरे में हो रही है, जिनकी भूमिका पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एसआईटी बनाकर मामले की जांच कराई जाए। परिजनों ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष के परिचित बड़े बड़े पदों पर बैठे हैं, वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।
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दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे
इससे पहले परिजन सीएम हाउस के मुख्य द्वार पर काफी देर तक डटे रहे और मामले में निष्पक्ष जांच तथा एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग करते रहे। परिजनों का आरोप है कि एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो शुरुआती दिनों में उनकी शिकायत पर केस दर्ज करने में देरी कर रहे थे। उनका कहना है कि ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम है और सबूत प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। परिजनों ने मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य एजेंसी से कराने और केस ट्रांसफर करने की मांग भी उठाई है।
पूर्व जज गिरिबाबा सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप
दरअसल, कटारा हिल्स क्षेत्र में रहने वाली 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने 12 मई की रात अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। मृतका के परिजनों ने पति और सास पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही ट्विशा परेशान थी। मामले में पुलिस ने समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और प्रताड़ना की धाराओं में केस दर्ज किया है। गिरिबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। शनिवार को परिजन पुलिस कमिश्नर से भी मिले थे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। पुलिस का कहना है कि दोबारा पोस्टमार्टम को लेकर कानूनी राय ली जा रही है और अंतिम निर्णय न्यायालय के निर्देश के अनुसार होगा। इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया है, जो सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस टीम की कमान एसीपी रजनीश कश्यप को सौंपी गई है, जबकि टीम में एक महिला पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया गया है। पुलिस ने बताया कि एसआईटी दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मौत के बाद सबूत मिटाने की कोशिश जैसे सभी पहलुओं की जांच करेगी।
