श्योपुर के चंद्रपुरा आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का शर्मनाक मामला सामने आया है। मासूमों की थाली में परोसे गए पोषाहार में कीड़े निकलने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया और तत्काल बड़ी कार्रवाई करते हुए भोजन सप्लाई करने वाले दो स्वसहायता समूहों को काम से हटा दिया गया।

चंद्रपुरा आंगनबाड़ी केंद्र में जब बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा गया तो दाल-सब्जी में कीड़े रेंगते मिले। मौजूद परिजनों ने तत्काल मोबाइल से वीडियो बनाया और नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से गुणवत्ताविहीन भोजन दिया जा रहा था। कई बार शिकायत के बाद भी सुधार नहीं हुआ। वीडियो वायरल होते ही जिले में हड़कंप मच गया।

मानकों की अनदेखी सामने आई


मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शीलू दाहिमा ने तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग को जांच के निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी की टीम ने मौके पर पहुंचकर भोजन के सैंपल जब्त किए और बच्चों व ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच में लापरवाही और मानकों की अनदेखी सामने आई।

जांच रिपोर्ट मिलते ही कलेक्टर शीलू दाहिमा ने सख्त रुख अपनाया। आंगनबाड़ी केंद्र में भोजन सप्लाई कर रहे गुरु महाराज स्वसहायता समूह और गणेश स्वसहायता समूह को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। दोनों समूहों का अनुबंध निरस्त कर नए समूहों को काम देने के निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर दाहिमा ने कहा, “आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित होने वाले पोषाहार की गुणवत्ता से सीधे बच्चों का स्वास्थ्य जुड़ा है। इसमें लापरवाही आपराधिक कृत्य है। भविष्य में ऐसी शिकायत मिली तो संबंधित सुपरवाइजर और अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।” उन्होंने सभी परियोजना अधिकारियों को केंद्रों का औचक निरीक्षण करने और हर सप्ताह भोजन की गुणवत्ता रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।



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दोषी समूहों के खिलाफ एफआईआर दर्ज


ग्रामीणों का कहना है कि चंद्रपुरा केंद्र में पहले भी कई बार खाने में कंकड़ और बदबू की शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वीडियो वायरल होने के बाद ही प्रशासन जागा। अब ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी समूहों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और भोजन की नियमित मॉनिटरिंग के लिए पालक समिति बनाई जाए।

इस घटना के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सभी 1,100 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। फूड सेफ्टी ऑफिसर और विभागीय टीमें सैंपल लेकर लैब भेजेंगी। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन देना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।



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