उज्जैन जिले के सबसे बड़े शासकीय चरक अस्पताल की व्यवस्थाएं इन दिनों सवालों के घेरे में हैं। सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया के कार्यभार संभालने के बाद से अस्पताल में अव्यवस्थाओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।


सोमवार शाम चरक भवन अस्पताल में करीब एक घंटे तक बिजली गुल रहने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जनरेटर बैकअप समय पर शुरू नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई वार्डों में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज चलता रहा।

एक घंटे तक अंधेरे में डूबा अस्पताल


जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 6:45 बजे अचानक बिजली गुल हो गई, जिससे पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब गया। करीब एक घंटे बाद, रात 7:45 बजे बिजली व्यवस्था बहाल हो सकी। अस्पताल में जनरेटर मौजूद होने के बावजूद बैकअप समय पर शुरू नहीं हो पाया, जिससे व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।

अव्यवस्थाओं के बीच चलता इलाजवार्डों में टॉर्च के सहारे इलाज

बिजली बंद होने से अस्पताल के वार्ड, गलियारे और कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभावित रहे। मरीजों के परिजन मोबाइल की टॉर्च जलाकर उनकी देखभाल करते नजर आए, जबकि कई मरीज गर्मी और उमस से बेहाल रहे। सबसे ज्यादा परेशानी इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिली, जहां काफी देर तक बिजली व्यवस्था ठप रही।

पढ़ें: बुरहानपुर में आग का कहर: बरसात से पहले जुटाया चारा आग में जलकर हुआ स्वाहा, पशुपालकों पर संकट; लाखों का नुकसान

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मरीजों के परिजनों का आरोप है कि बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। नाराज लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। चरक अस्पताल में इससे पहले भी ऑक्सीजन प्लांट और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। प्रशासन लगातार सुधार के दावे करता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग नजर आ रहे हैं। ताजा ब्लैकआउट की घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रशासन की तैयारियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *