बरगी डैम क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद अब तकनीकी खामियों और संभावित लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्रूज के पायलट महेश पायलट ने दावा किया है कि हादसे के वक्त एक इंजन धीमा चल रहा था। इस बयान ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्रूज पायलट के मुताबिक, क्रूज का एक इंजन पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि 38 लाख रुपए तीन साल पहले क्रूज की मरम्मत पर कहां खर्च किए गए? वहीं, अब यह सवाल भी उठ रहा है कि 38 लाख रुपये आखिर किन कामों पर खर्च किए गए? अगर क्रूज हाल ही में री-फिट होकर “सुरक्षित” था, तो फिर इंजन में खराबी कैसे आई? क्या मेंटेनेंस में लापरवाही या भ्रष्टाचार ने 13 लोगों की जान ले ली? 

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मौसम के यलो अलर्ट की नहीं दी गई कोई जानकारी 

क्रूज पायलट महेश पटेल ने मीडिया से बातचीत में  बताया कि वापसी के दौरान अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और बांध में  ऊंची लहरें उठने लगीं, जिससे क्रूज में पानी भरने लगा। उन्होंने किसी तरह उसे किनारे लाने की कोशिश की। पटेल ने बताया कि यात्रियों ने फोटो-वीडियो बनाने के चक्कर में लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि संचालन से पहले मौसम की कोई जानकारी नहीं दी गई और अपने खिलाफ की गई कार्रवाई  को गलत बताया।  

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38 लाख का री-फिट, फिर भी हादसा?

पर्यटन निगम के सलाहकार और पूर्व नौसेना कमांडर राजेंद्र निगम ने अमर उजाला से बातचीत में दावा किया था कि वर्ष 2024 में क्रूज का मीडियम री-फिट किया गया था, जिस पर करीब 38 लाख रुपये खर्च हुए। इस दौरान इंजन, शॉफ्ट, हल समेत 17 अहम तकनीकी बदलाव किए गए थे। दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के बाद क्रूज की उम्र 10 साल तक बढ़ गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप था। ऐसे में सवाल यह है कि फिर क्रूज का एक इंजन खराब कैसे हो गया।  

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जांच से पहले क्रूज तोड़ने पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर भी है कि हादसे के तुरंत बाद, जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को क्यों तोड़ दिया गया? जानकारों का मानना है कि इससे अहम तकनीकी सबूत नष्ट हो सकते हैं, जो हादसे के असली कारणों का पता लगाने में मदद करते। घटना के बाद से ही निष्पक्ष और तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। 

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20 साल पुराना क्रूज बिना बीमा के चल रहा था

बता दें  20 साल पुराना क्रूज बिना वैध बीमा के चल रहा था, जो केंद्र के कानून का उल्लंघन है। यहीं नहीं 200 रुपए टिकट लेने के बावजूद लोगों का भी बीमा नहीं था, जबकि दूसरे राज्यों में पांच लाख रुपए तक का बीमा टिकट के साथ किया जाता है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश में क्रूज के यात्रियों का बीमा क्यों नहीं किया जा रहा। जबलपुर दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत ने पर्यटन विभाग के पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 4 बच्चे, 8 महिलाएं और 1 पुरुष अपनी जान गंवा चुके हैं। 

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जांच समिति सभी पहलुओं पर जांच करेगा: मंत्री 

वहीं, मामले में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी का कहना है कि जांच समिति बनी है। इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जाएगी। 

 



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