देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी रविवार को इंदौर के विभिन्न केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा और सख्त नियमों के बीच आयोजित की गई। इंदौर शहर में करीब 23 हजार विद्यार्थी इस परीक्षा में सम्मिलित हुए। पिछले साल की अव्यवस्थाओं से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने बिजली से लेकर यातायात तक के पुख्ता इंतजाम किए थे। सख्त ड्रेस कोड और सघन चेकिंग के बाद ही परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा का त्रि-स्तरीय घेरा रहा और नकल रोकने के लिए सख्त नियमों का पूरी तरह पालन कराया गया।

सख्त प्रक्रिया के तहत केंद्रों पर मिली एंट्री

परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के लिए बेहद सख्त प्रक्रिया अपनाई गई। ड्रेस कोड के नियमों के तहत विद्यार्थियों को केवल हाफ स्लीव टी-शर्ट और चप्पल पहनकर ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। जूतों और पूरी बाजू के कपड़ों पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहा। पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक के माध्यम से आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग की गई और आधार कार्ड की गहन जांच के बाद ही विद्यार्थियों को उनकी निर्धारित सीट तक जाने दिया गया। केंद्रों पर छात्राओं की ज्वेलरी भी बाहर निकलवाकर रखवाई गई। इसके साथ केंद्रों पर छात्रों को बैठने के लिए शेड भी तैयार किए गए थे। 

बिजली कटौती से निपटने के लिए जनरेटर की व्यवस्था

पिछले वर्ष परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों पर बिजली गुल होने से परीक्षार्थियों की एकाग्रता भंग होने की शिकायतें आई थीं। इस बार एनटीए और जिला प्रशासन ने किसी भी प्रकार का जोखिम न लेते हुए हर केंद्र पर जनरेटर की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की। इसके साथ ही बिजली विभाग को भी परीक्षा के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए थे।

बसों के बजाय निजी वाहनों को मिली प्राथमिकता

प्रशासन ने परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से सांबर, सिमरोल, आईआईएम और महू जैसे चार प्रमुख रूटों के लिए एआईसीटीएसएल की विशेष बसें सुबह 8.30 बजे से तैनात की थीं। हालांकि, अधिकांश परीक्षार्थी अपने परिजनों के साथ निजी वाहनों से ही केंद्रों तक पहुंचे, जिसके कारण सरकारी बसें स्टॉप पर ही खड़ी नजर आईं।

केंद्रों पर सुबह से ही जमा हुए परीक्षार्थी

परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी थी और रिपोर्टिंग का समय सुबह 11 बजे निर्धारित था, लेकिन परीक्षा के तनाव और समय को लेकर हुई गफलत के कारण कई विद्यार्थी सुबह 9 बजे ही केंद्रों पर पहुंचना शुरू हो गए थे। तेज धूप होने के बावजूद परीक्षार्थी और उनके अभिभावक केंद्रों के बाहर डटे रहे। दोपहर 1.30 बजे के बाद केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए। शाम 5 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र अपने घरों के लिए रवाना हुए।



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