मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार द्वारा यूसीसी पर समिति गठन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार यूसीसी के नाम पर नई बहस खड़ी कर रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह दलितों और आदिवासियों को न्याय दिला पाएगी। जिन समुदायों की अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान अलग है, क्या उन पर यूसीसी थोपा नहीं जाएगा? उन्होंने कहा कि भाजपा को साफ बताना होगा कि क्या ‘समानता’ के नाम पर विविधता को कुचलने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समानता के पक्ष में है, लेकिन किसी भी वर्ग के साथ अन्याय के नहीं। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यूसीसी सर्वसम्मति से लागू होगा या इसे जबरन थोपा जाएगा।
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दरअसल, सोमवार को मोहन सरकार ने यूसीसी को लेकर समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विधियों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों का अध्ययन और परीक्षण करेगी। बता दें कि मध्यप्रदेश में आदिवासी आबादी काफी बड़ी है। प्रदेश की कुल आबादी में करीब 22 प्रतिशत आदिवासी वर्ग शामिल है और विधानसभा में इनके लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इन समुदायों की अपनी अलग सामाजिक परंपराएं और सांस्कृतिक व्यवस्था है। देश में उत्तराखंड और गुजरात में यूसीसी कानून लागू किया जा चुका है, जहां आदिवासी समुदायों को कुछ मामलों में छूट दी गई है। अब मध्यप्रदेश में भी यही सवाल उठ रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
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