अमित मिश्रा, नईदुनिया, ग्वालियर। साइबर ठगी के मामलों में बड़ा खुलासा हुआ है। ग्वालियर से ही म्यूल खातों का संगठित नेटवर्क संचालित हो रहा है, जहां जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते महज 10 हजार रुपये में खरीदे जा रहे हैं और इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी की रकम विदेश भेजी जा रही है।
दो बिचौलिये गिरफ्तार, बड़ा खुलासा
पुलिस ने चार शहर का नाका और बहोड़ापुर क्षेत्र के मनीष यादव और ईशू रजक को गिरफ्तार किया है। इनके मोबाइल से मिले डाटा से सामने आया है कि ये बिचौलिये टेलीग्राम और वाट्स एप के माध्यम से चीन, कंबोडिया और दुबई में बैठे ठगों से जुड़े हुए हैं।
220 ग्रुप से जुड़े, विदेश तक नेटवर्क
दोनों आरोपित करीब 220 टेलीग्राम और वाट्स एप ग्रुप से जुड़े थे। इन ग्रुप में विदेश में बैठे ठग खातों की मांग करते थे, जिसके बाद यह बिचौलिये खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों में ठगी की रकम जमा कर उसे आगे कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था।
क्रिप्टो के जरिए विदेश भेजते रकम
ठगी की रकम को यूएसडीटी के माध्यम से क्रिप्टो करंसी में बदलकर ठगों के वालेट में भेजा जाता था। इसके लिए गूगल ट्रांसलेटर का उपयोग कर भाषा की समस्या को भी दूर किया जाता था।
20 प्रतिशत कमीशन, 122 खातों का रिकॉर्ड
बिचौलिये हर लेनदेन पर करीब 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे। इनके पास 122 बैंक खातों को बेचने का रिकॉर्ड मिला है, जिनमें से 12 खाते ग्वालियर के ही हैं।
कियोस्क सेंटर पर फंसाते थे लोग
आरोपित बैंक कियोस्क सेंटर के आसपास जरूरतमंद लोगों को तलाशते थे और उन्हें खाता किराये पर देने या नया खाता खुलवाने के बदले पैसे का लालच देते थे।
पुलिस का बयान
डीएसपी क्राइम ब्रांच मनीष यादव ने बताया कि म्यूल खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है और इस मामले में आगे की जांच जारी है।
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