वरुण शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। पूरे मध्य प्रदेश में जमीनों के घोटाले और रिकॉर्ड में हेरफेर के लिए कुख्यात ग्वालियर के माफी औकाफ में अब मंदिरों का रिकॉर्ड भी सड़ाया जा रहा है। संभागायुक्त कार्यालय के अंतर्गत आने वाले रिकॉर्ड रूम में यही हालात हैं। यह बेपरवाही है या षड्यंत्र, यह तो जांच में पता चलेगा लेकिन यहां आठ कमरों का माफी औकाफ का रिकॉर्ड दो कमरों में ठूंस दिया गया है, जिसके बाद हालात बद से बदतर हैं।
रिकॉर्ड रूम में माफी के रजिस्टरों में दीमक घुस चुकी हैं, बस्तों के पन्ने सड़कर टपकर रहे हैं, कौन सा रिकॉर्ड कहां रखा है कुछ पता ही नहीं है। यहां वर्ष 1920 तक के रिकॉर्ड रखे हुए हैं, रियासत काल का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया था।
पहले मोतीमहल के आठ कमरों में ग्वालियर संभाग के जिलों के मंदिरों का रिकॉर्ड रखा हुआ था, जिसे शिफ्ट कर यहां दो कमरों में कचरे की तरह भर दिया गया। यहां ग्वालियर स्टेट में शामिल रहे मध्य प्रदेश के 16 जिलों का माफी रिकॉर्ड जमा है, जिनमें ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, भिंड, श्योपुर, अशोकनगर, मुरैना सहित टीकमगढ़, छतरपुर और जबलपुर जिले शामिल हैं।
संभागीय माफी कार्यालय की मानीटरिंग की जिम्मेदारी संभागायुक्त की होती है, जो कि वर्तमान में मनोज खत्री हैं। अब रिकॉर्ड ही पूरा नष्ट हो जाएगा तो जमीनों में हेरफेर कौन रोक सकता है, यह पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है।
लिखा है सरकार श्रीमंत महाराज जीवाजीराव साहेबमाफी के रिकॉर्ड
रूम में इतना पुराना रिकॉर्ड है कि पेज पीले पड़ गए हैं, कोई हाथ लगा दे तो टपक कर गिर जाए। यहां एक रजिस्टर पर सरकार श्रीमंत महाराज जीवाजीराव साहेब शिंदे, आलीजाह सन 1920 ई संवत 1985 लिखा है। रिकॉर्ड रूम में कार्यालय संभाग आयुक्त ग्वालियर का पेज चिपका हुआ है।
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एक बस्ते पर तहकीकात मिसलें, परगना-मेहगांव व नए व पुराने क्रमांक लिखे हैं। महत्वपूर्ण रिकॉर्ड इस तरह सड़कर नष्ट हो जाने से माफी की संपत्तियों को लेकर बड़े हेरफेर हो सकते हैं। ग्वालियर संभाग में पहले ही करोड़ों के जमीन घोटाले चल रहे हैं, एक मामला तो 1200 करोड़ का लंबित है, जिसमें माफी की संपत्तियों को दूसरे के नाम चढ़ा दिया गया।
माफी रिकॉर्ड रूम दो कक्षों में है इसके लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। प्रयास किए जा रहे हैं कि रिकॉर्ड डिजिटलाइज हो जाए। यहां माफी का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है जिसे पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा- सपना तिवारी, संभागीय माफी अधिकारी, ग्वालियर।
