मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर मंत्रिमंडलीय समिति की पांचवीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में सिंहस्थ से जुड़े कामों को समय पर पूरा करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी निर्माण और तैयारियां वर्ष 2027 की दीपावली तक हर हाल में पूरी कर ली जाएं। बैठक में सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित विभागों में जहां भी जरूरत हो, वहां तत्काल पद पूर्ति करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि सिंहस्थ से जुड़े कार्यों में लगे कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।

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22 विकास कार्यों को मंजूरी

बैठक में कुल 2,923 करोड़ 84 लाख रुपये के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इनमें उज्जैन शहर के कई प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, सीमेंट कंक्रीट सड़कों का निर्माण और सौंदर्यीकरण शामिल है। गुदरी चौराहा, हरसिद्धि क्षेत्र, नानाखेड़ा, मंगलनाथ, महाकाल क्षेत्र सहित कई मार्गों के उन्नयन को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा क्षिप्रा नदी के किनारे सड़क निर्माण और नए पुल बनाने जैसे कार्य भी शामिल हैं।

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थर्ड पॉर्टी ऑडिट से हो गुणवत्ता का ऑडिट 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरे किए जाएं। इसके लिए थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा, ताकि वित्तीय प्रबंधन और निर्माण गुणवत्ता में पारदर्शिता बनी रहे।  सिंहस्थ के लिए उज्जैन के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाले भवनों का निर्माण इस प्रकार किया जाए, ताकि वे सिंहस्थ के बाद होने वाले वार्षिक आयोजनों के लिए भी उपयोगी हों। इसी प्रकार सड़कों का निर्माण इस प्रकार किया जाए जिससे महाकाल लोक के अतिरिक्त उज्जैन के अन्य प्रमुख तीर्थों तक आवागमन अधिक सुगम हो सके। 

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100 किमी में बनेंगे होम स्टे, पार्किंग 

सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होम स्टे, पार्किंग और जन सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्थानीय संस्थाओं और जनता की भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भवन बनाए जाएंगे, वे सिंहस्थ के बाद भी अन्य आयोजनों में उपयोगी रहें। वहीं सड़कों का निर्माण इस तरह किया जाए कि महाकाल लोक के साथ-साथ अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। 

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निगरानी करने 139 करोड़ में बनेगा कमांड सेंटर 

बैठक में 139.14 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने को मंजूरी दी गई। इस केंद्र के जरिए सीसीटीवी, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स से मेले की निगरानी की जाएगी। एआई आधारित भीड़ प्रबंधन और मोबाइल ऐप के माध्यम से श्रद्धालुओं को रूट, पार्किंग और अन्य सुविधाओं की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा मेला कंट्रोल रूम, ट्रांजिट हब, स्काईवॉक, सर्किट हाउस और स्थायी अधोसंरचना जैसे कई कार्यों को भी स्वीकृति दी गई।

 



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