न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: Dinesh Sharma

Updated Sun, 22 Mar 2026 08:40 PM IST

उज्जैन में सिंहस्थ से पहले अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर विवाद उभर आया है। 13 अखाड़े दो गुटों में बंटे हैं। 8 अखाड़ों के समर्थन से रविंद्र पुरी ने खुद को अध्यक्ष बताया, जबकि दूसरे गुट ने अलग दावा किया।


Ravindrapuri reached Ujjain and said- I am President of All India Akhara Parishad, eight Akharas are with me

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष विवाद पर बोले रविंद्र पुरी महाराज
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

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उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है तो वहीं दूसरी और साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इसी बीच रविवार को मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। संतों के इस समागम में 13 में से 8 अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। इसके बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से 8 अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं।

 



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