नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीज महीनों से परेशान थे, लेकिन जैसे ही नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फार हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) की टीम पहुंची, वैसे ही तीन लिफ्टें ठीक हो गईं। एनएबीएच की टीम ने अस्पताल का दो दिवसीय निरीक्षण किया। टीम के सामने व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाने के लिए प्रबंधन ने सभी इंतजाम तेजी से किए। जो लिफ्टें आठ महीने से खराब पड़ी थीं, वे निरीक्षण से पहले ही चालू कर दी गईं। इसे केवल प्रमाण पत्र बचाने की कवायद बताया जा रहा है।

अस्पताल की कार्यप्रणाली का विरोधाभास लिफ्ट व्यवस्था में सामने आया। पिछले आठ महीनों से पांच लिफ्ट बंद थीं, जिसके कारण स्वजन मरीजों को स्ट्रेचर पर रैंप के जरिए पांचवीं मंजिल तक ले जाने को मजबूर थे। जीआरएमसी प्रबंधन अब तक बजट और प्रस्ताव की कमी का हवाला देता रहा, लेकिन एनएबीएच टीम के दिल्ली से रवाना होते ही तीन लिफ्टों को आनन-फानन में दुरुस्त करा दिया गया। हालांकि दो लिफ्टें अब भी बंद पड़ी हैं।

खामियों पर पेंट और फाल्स सीलिंग का पर्दा

निरीक्षण के दौरान प्रबंधन ने खामियां छिपाने के प्रयास किए। अस्पताल के कई हिस्सों में गिरी हुई फाल्स सीलिंग को ढका गया या बदला गया। इन दो दिनों में स्टाफ पूरी तरह अनुशासित और अप-टू-डेट नजर आया।

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टीम ने हर व्यवस्था का किया निरीक्षण

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की एनएबीएच मान्यता के नवीनीकरण के लिए दिल्ली से डॉ. मधु हांडा और भिलाई से डॉ. प्रतिमा गोस्वामी ग्वालियर पहुंचीं। टीम ने ओपीडी, पर्ची काउंटर, एक्स-रे, सोनोग्राफी और एमआरआइ सेंटर का बारीकी से निरीक्षण किया। मरीजों को मिलने वाले इलाज की गुणवत्ता और मेडिकल रिकॉर्ड के संधारण की भी जांच की गई। बुधवार को सुरक्षा व्यवस्था की परख के लिए टीम ने प्रेजेंटेशन देखा और अस्पताल में मॉक ड्रिल कराई।

स्थायी सुधार नहीं, सिर्फ दिखावटी इंतजाम

नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि निरीक्षण के लिए किए गए सभी इंतजाम अस्थायी हैं। लिफ्ट मरम्मत से लेकर सीलिंग सुधार तक केवल ऊपरी स्तर पर काम किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्थायी सुधार के केवल कागजी प्रक्रिया के जरिए मान्यता हासिल करना मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता के लिए नुकसानदायक है।



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