प्रदेश में श्री अन्न (कोदो-कुटकी) प्रोत्साहन योजना में घोटाले का मामला सामने आया है। आदिवासी किसानों से कोदा-कुटकी की खरीदी हुई नहीं, जबकि 50 लाख रुपये के पीपी बैग खरीद लिए गए। अब इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत की गई है। बता दें, प्रदेश में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अंतर्गत रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना लागू है, जिसके तहत करीब 105 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पिछले दो वर्षों से किसानों से ना तो फसल खरीदी गई और ना ही उन्हें किसी प्रकार का भुगतान किया गया। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि श्री अन्न प्रोत्साहन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (फेडरेशन) द्वारा खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताएं की जा रही हैं। बिना किसी स्पष्ट खरीदी प्रक्रिया के करीब 50 लाख रुपये के पीपी बैग मनमाने दामों पर खरीदे गए। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिसमें निविदा प्रक्रिया, प्राप्त आवेदनों और चयनित सप्लायर की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
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पंजीयन के नाम पर किसानों से 300 रुपये वसूले
श्री अन्न प्रोत्साहन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (फेडरेशन) को करीब 30,000 मीट्रिक टन मोटे अनाज खरीदी का लक्ष्य तय दिया गया था। इसमें बताया गया कि कुटकी की प्रति क्विंटल कीमत 3,500 रुपये और कोदो की प्रति क्विंटल कीमत 2,500 रुपये तय की गई है। साथ ही योजना के तहत पंजीयन के बाद 1000 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का प्रावधान है। हद तो यह है कि रीवा सहित कई जिलों में किसानों से पंजीयन के नाम पर 300 रुपये वसूले गए। इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई।
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उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग
शिकायत में कंपनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर नियुक्ति शर्तों का उल्लंघन और मानदेय भी बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया और सलाहकार समिति की अनुशंसा के बढ़ाया गया है। पूर्व विधायक सकलेचा ने बताया कि उन्होंने मामले में मुख्यमंत्री और कृषि विभाग के सचिव को शिकायत की है। इसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि आदिवासी किसानों को उनका उचित हक मिल सके।
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शिकायत मिली, दिखवा रहे
मामले में विभाग के सचिव निशांत बरवड़े को संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं, विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के अनुरोध पर बताया कि विभाग को शिकायत मिली है। उसके बिन्दूओं को देखवा रहे हैं।