प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में पेश 2026-27 के बजट को विकास के साथ वित्तीय अनुशासन का बजट बताया है। इसमें राजस्व आमदनी बढ़ाने और खर्च को नियंत्रित तरीके से बांटने पर खास जोर है। इस बजट से साफ संकेत मिलता है कि सरकार दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और खर्चीला विकास दोनों को ध्यान में रख रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व हिस्से में वृद्धि का अनुमान है और जीएसटी व राज्य करों से मिलने वाली आमदनी में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। पिछले वित्त वर्ष के अनुसार 2025-26 में कर राजस्व में 10 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का लगभग 3.87 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह स्थिति संकेत देती है कि सरकार राजस्व बढ़ाने की दिशा में प्रगतिशील कदम उठा रही है। बजट का आकार पिछले साल के 4.21 लाख करोड़ से बढ़ाकर लगभग 4.38 लाख करोड़ रुपये किया है। इस बढ़ी हुई प्रस्तावित राशि में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे प्राथमिक क्षेत्रों को भारी हिस्सा दिया गया है। सरकार ने वित्तीय संसाधनों के आवंटन और आय के स्रोतों को लेकर स्पष्ट किया है कि प्रत्येक 1 रुपये की आय में किस क्षेत्र का कितना योगदान है और उसे किन विकास कार्यों पर खर्च किया जा रहा है।
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मध्य प्रदेश का बजट 2026-27
– फोटो : अमर उजाला
रुपया आएगा
सरकारी खजाने में आने वाले प्रत्येक 1 रुपये में से 30% (30 पैसे) हिस्सा राज्य के अपने करों से आएगा। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और वित्तीय हस्तांतरण से 29% (29 पैसे) प्राप्त होगा। पूंजीगत प्राप्ति का हिस्सा 21% (21 पैसे) रहेगा। विभिन्न योजनाओं के लिए मिलने वाला अनुदान 14% (14 पैसे) रहेगा। वहीं, गैर-कर राजस्व यानी अन्य स्रोतों से होने वाली आय 6% (6 पैसे) होगी।
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रुपया जाएगा
सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले प्रत्येक 1 रुपये में से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्य पर सर्वाधिक 14% (14 पैसे), स्वास्थ्य सेवाओं पर 13% (13 पैसा), आधारभूत ढांचे के विकास पर 11% (11 पैसा), शिक्षा पर 10% (10 पैसे), कृषि क्षेत्र पर 9% (9 पैसा) और सामान्य सेवाओं के लिए भी 9% (9 पैसा) खर्च होंगे। पुराने कर्जों के भुगतान पर 8% (8 पैसा) और ब्याज भुगतान पर भी 8% (8 पैसा) खर्च होंगे। पेंशन पर 7% (7 पैसा), सामाजिक क्षेत्र पर 5% (5 पैसा), अन्य सेवाएं 4% (4 पैसा), रोजगार पर 1% (1 पैसा) और संस्कृति 1% (1 पैसा)।
