मध्यप्रदेश में सड़क और भवन निर्माण कार्यों को नई गति देते हुए लोक निर्माण विभाग ने बड़े सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अब विभाग द्वारा बनाए जाने वाले सभी भवन पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन बिल्डिंग मानकों के तहत निर्मित होंगे। वहीं, लोकपथ मोबाइल एप के माध्यम से सड़क से जुड़ी शिकायतों का समाधान अधिकतम चार दिनों में सुनिश्चित किया जा रहा है।
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मंत्री सिंह ने विभाग की उपलब्धियां साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 17,284 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में बनी सरकार ने ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के लक्ष्य को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की है, जिस पर तेजी से अमल हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निरंतर मार्गदर्शन से सड़क और अवसंरचना विकास को नई दिशा मिली है।
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739 भवनों का निर्माण पूरा किया
प्रदेश में लगभग 4.2 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसमें से 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आती हैं। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, प्रमुख जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। फोरलेन और डबल लेन सड़कों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि शेष मार्गों का चरणबद्ध उन्नयन जारी है। बीते दो वर्षों में विभाग ने 6,627 करोड़ रुपये की लागत से 739 भवनों का निर्माण पूरा किया है। इसके साथ ही हजारों करोड़ की फ्लैगशिप परियोजनाएं भी पूर्ण की गई हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य शहरों में फ्लाईओवर, एलिवेटेड कॉरिडोर, रेलवे ओवरब्रिज और प्रमुख पुलों के निर्माण से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।
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सिक्सलेन सड़कों के निर्माण पर फोकस
राज्य में हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे और सिक्सलेन सड़कों के निर्माण पर विशेष फोकस किया गया है। उज्जैन-जावरा, इंदौर-उज्जैन और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जैसी योजनाएं प्रगति पर हैं। एडीबी, एनडीबी और एनएचएआई के सहयोग से हजारों किलोमीटर सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है। लोकपथ मोबाइल एप के जरिए अब तक 11 हजार से अधिक शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। एप के माध्यम से सड़क मरम्मत की निगरानी आसान हुई है और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, जीआईएस आधारित रोड नेटवर्क प्लानिंग और डिजिटल मैपिंग पर भी काम चल रहा है।
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वैज्ञानिक तरीके से पेड़ों का स्थानांतरण
निर्माण कार्यों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रिचार्ज सिस्टम, वैज्ञानिक तरीके से पेड़ों का स्थानांतरण और बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया है। गुणवत्ता जांच के लिए आधुनिक तकनीक, मोबाइल लैब और डिजिटल सिस्टम अपनाए गए हैं। मंत्री ने बताया कि अगले तीन वर्षों में एक्सप्रेस-वे, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, रिंग रोड और ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित कर मध्यप्रदेश को आधुनिक परिवहन और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करना है।
