भला श्मशान भी कहीं और कभी रोता है क्या….? यह सवाल अनूठा लग सकता है, लेकिन इंदौर के तिलक नगर का श्मशान बुधवार शाम को उस वक्त सन्नाटे को चीरता और चित्कारता दिखाई और सुनाई दिया, जब यहां सात अंत्येष्टि एक साथ हुई और एक नन्हा शिशु दफनाया गया। उस वक्त श्मशान की आत्मा भी कांप उठी और सिहर उठा हर वह शख्स जो वहां मौजूद था या इन पलों की तस्वीरों का साक्षी बना। 

Trending Videos

एक दिन पूर्व मंगलवार दोपहर मैं अपने रिश्ते के मामा और खजूरी बाजार वाले बालाभाऊ राजवैद्य परिवार के सदस्य पुरुषोत्तम जी वैद्य की अंत्येष्टि में शामिल होने इस मुक्तिधाम गया था। तब इस श्मशान का सन्नाटा देख हैरान रह गया था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि यहां सुबह से कोई चिता ही नहीं जली? सवाल मन में आया तो उत्तर भी खोजा और महसूस किया कि पूर्वी क्षेत्र के लोगों की इम्युनिटी अच्छी है, ईश्वर का शुक्र है कि इस दिन श्मशान देवता का श्रृंगार करने दोपहर तक एक भी अर्थी नहीं पहुंची और चिता नहीं सजी, लेकिन अगले ही दिन बुधवार को यहां जब सात लाशें और बॉक्स में बंद होकर शिशु का शव पहुंचा तो मानो श्मशान भी रो पड़ा। वह रो रो कर कह रहा था, मेरे श्रृंगार की जरूरत तो थी, लेकिन किसी का पूरा परिवार उजाड़ कर मैं श्रृंगार नहीं करना चाहता….। यमदेव तूने ये क्या किया….मां अहिल्या की नगरी में इलाज के लिए बिहार से पहुंचे पूरे परिवार के साथ अत्याचार कर उसे मौत की नींद सुला दिया। किसी के सुहाग को उजाड़ दिया तो किसी नवविवाहिता को गर्भस्थ शिशु के साथ मेरे पास पहुंचा दिया। यमदूतों तुमने ये क्यों कहर बरपाया…..। शर्म नहीं आई तुम्हें यह कृत्य करते…। माना कि मुझे चिता की भस्म प्रिय है, लेकिन ऐसा पाप सह नहीं सकता…..। बता आखिर तूने ऐसा क्यों किया…..? हर ऐसे सवाल को प्रारब्ध और कर्मों की आड़ लेकर दफन करने वाले यमदेव ये तेरा कैसा न्याय है? बता तूने क्यों उजाड़ा सेठिया परिवार? क्यों भरी कोख से सिमरन को मेरे पास भेजा? क्यों मनोज पुगलिया के परिवार को ताउम्र सदमा दिया? जानता हूं…तेरे पास सवालों के जवाब नहीं हैं…कलयुग में तू भी अन्याय करने लगा है….। बेगुनाहों को मेरी शरण में भेज रहा है…पर याद रख मेरे ईष्ट महादेव के पास वह ताकत है, जिसके दम पर वे उजड़े और बिछड़े परिवार को पुन: किसी न किसी रूप में बसाने और मिलाने की ताकत रखते हैं। सनातन धर्म पुनर्जन्म में आस्था रखता है और यदि किसी के साथ यमदेव ने अन्याय किया हो तो आदिदेव उसे फिर जीवन और वरदान देने की सामर्थ्य रखते हैं। पुगलिया और सेठिया परिवार के प्रति यही संवेदना है कि वे धीरज रखें। खोए हुए परिजनों से उनका किसी न किसी रूप में पुनर्मिलन फिर होगा….ना जाने किस भेष में उन्हें फिर नारायण मिलेंगे और उनके दुख दर्द दूर करेंगे। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *