प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन विवाद को लेकर ग्वालियर में जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अन्याय उनके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानं …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 22 Jan 2026 08:36:21 AM (IST)Updated Date: Thu, 22 Jan 2026 09:32:02 AM (IST)

रामभद्राचार्य बोले- अविमुक्तेश्वरानंद अभी शंकराचार्य नहीं, उनके साथ अन्याय नहीं हुआ, उन्होंने अन्याय किया
रामभद्राचार्य

HighLights

  1. अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ, अन्याय तो उन्होंने किया है
  2. शंकराचार्य लिखने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने नोटिस देकर ठीक किया
  3. हिमालय से इंदु सरोवर तक फैला क्षेत्र हिन्दुस्थान कहलाता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन विवाद को लेकर ग्वालियर में जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अन्याय उनके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) साथ नहीं हुआ, अन्याय तो उन्होंने किया है। अविमुक्तेश्वरानंद अभी जगदगुरु ही नहीं बने हैं। गंगा तट तक रथ से नहीं जाया जाता है। गंगा स्नान के लिए पैदल ही जाया जाता है। मैं भी संगम में पैदल ही जाता हूं।

पुस्तक का विमोचन करने पहुंचे थे

रामभद्राचार्य बुधवार को यहां मध्य प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के पिता स्व. हाकिम सिंह तोमर द्वारा रचित पुस्तक “बोध: कर्तव्य बोध में चिंतन की दिशा” का विमोचन करने पहुंचे थे।

बता दें, प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर पालकी शोभायात्रा रोकने और शिष्यों से मारपीट का आरोप लगाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरना देकर विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें पदनाम शंकराचार्य लिखने को लेकर नोटिस दिया है, तो उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का संदर्भ देकर जवाबी नोटिस दिया है।

नोटिस देकर ठीक किया

शंकराचार्य लिखने के प्रश्न पर जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस देकर ठीक किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शंकराचार्य नहीं बनाया है। किसी भी संत को नियमों से ऊपर खुद को नहीं समझना चाहिए।

दिग्विजय सिंह के बयान का दिया जवाब

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान- भारत में कोई ‘हिंदू’ नहीं, यह फारसी शब्द है, इसपर जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि दिग्विजय सिंह को शास्त्र के बारे में कुछ भी नहीं पता। जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कई उदाहरण दिए। उन्होंने एक श्लोक का उल्लेख कर बताया कि हिमालय पर्वत से शुरू होकर इंदु सरोवर (हिंद महासागर) तक फैला हुआ, देवताओं द्वारा निर्मित यह भौगोलिक क्षेत्र ‘हिन्दुस्थान’ कहलाता है। स्पष्ट है कि यहां हिंदू रहते हैं।



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