नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सख्त अनुशासन के लिए पहचानी जाने वाली एसएएफ बटालियन में ही अवैध जुए का अड्डा संचालित हो रहा था। इस पूरे खेल का संचालन SAF का जवान धीरेंद्र सिंह चौहान (द्वितीय वाहिनी) कर रहा था। उसके साथ 13वीं वाहिनी का आरक्षक मलखान सिंह और अन्य बाहरी लोग भी जुए में शामिल थे। सोमवार शाम को क्राइम ब्रांच और कंपू थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारकर इस अवैध गतिविधि का पर्दाफाश किया।

संयुक्त टीम ने मारी दबिश

पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि एसएएफ की 14वीं बटालियन परिसर में पुराने सरकारी आवास में जुए का अड्डा चल रहा है। इस पर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कंपू थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार और क्राइम ब्रांच प्रभारी अमित शर्मा को कार्रवाई के निर्देश दिए।

सोमवार को संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। पुलिस को देखते ही वहां भगदड़ मच गई, लेकिन टीम ने पीछा कर 10 लोगों को पकड़ लिया। एक युवक मौके से भागने में सफल रहा।

दो आरक्षक निलंबित

गिरफ्तार आरोपियों में एसएएफ के दो आरक्षक भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

लाखों रुपये और मोबाइल जब्त

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 2.90 लाख रुपये नकद और नौ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। सभी आरोपियों को कंपू थाने ले जाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

सरगना आरक्षक का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि आरक्षक धीरेंद्र सिंह चौहान लंबे समय से इस जुए के अड्डे का संचालन कर रहा था। उसने इसके लिए एक वाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था, जिसके जरिए लोगों को जोड़ा जाता था। वह रोजाना करीब पांच हजार रुपये तक कमीशन कमाता था। बताया गया कि वह वर्दी का रौब दिखाकर अन्य लोगों को प्रभावित करता था और अपने साथियों से कहता था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

‘यहां पुलिस नहीं आती’ का दावा

पकड़े गए अन्य आरोपियों ने पुलिस को बताया कि आरक्षक उन्हें भरोसा दिलाता था कि इस स्थान पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वह कहता था कि यहां पुलिस भी नहीं आती, इसलिए बेखौफ होकर जुआ खेल सकते हैं। यहां शराब सेवन भी किया जाता था।



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