ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, एपीके फाइल भेजकर रकम ऐंठने जैसे मामलों में आईटी एक्ट की धारा अनिवार्य है। आईटी एक्ट गैर-जमानती अपराध …और पढ़ें

HighLights
- डेढ़ माह पहले प्रदेश भर में शुरू की गई व्यवस्था में नहीं दर्ज की जा रही आईटी एक्ट की धारा
- प्रदेश भर में शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था में पुलिस की बड़ी चूक सामने आई है
- मुकदमों में आईटी एक्ट की धारा 66-डी न लगाकर केवल धोखाधड़ी की धाराएं लगाई जा रही
अमित मिश्रा, नईदुनिया, ग्वालियर। साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिसंबर 2025 से ग्वालियर सहित प्रदेश भर में शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था में पुलिस की बड़ी चूक सामने आई है। इस व्यवस्था के तहत थानों में दर्ज किए जा रहे मुकदमों में आईटी एक्ट की धारा 66-डी न लगाकर केवल धोखाधड़ी की धाराएं लगाई जा रही हैं।
जबकि ऐसे मामलों में क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज किए जा रहे मामलों में बीएनएस की धाराओं के साथ ही आईटी एक्ट भी लगाया गया है ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके। थानों में ऐसा न होने का फायदा साइबर अपराधियों को मिल सकता है। नईदुनिया ने की पड़ताल में थानों में ऐसे कई केस सामने आए हैं। इसका फायदा साइबर ठगों को मिल रहा है।
इन उदाहरण से समझिए धाराओं से खेल
क्राइम ब्रांच में दर्ज एफआईआर
- 1- 11 जनवरी को रिटायर्ड सब रजिस्ट्रार बिहारीलाल गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 1.41 करोड़ रुपये की ठगी में क्राइम ब्रांच थाने में एफआइआर हुई।
धारा : बीएनएस 318(4), बीएनएस 319(2), बीएनएस 308(2), आइटी एक्ट-66 डी
- 2- बीएसएफ के आरक्षक अवनीश खान के साथ आठ लाख रुपए की साइबर ठगी मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा 14 फरवरी को एफआइआर दर्ज हुई।
धारा : बीएनएस 318(4), आइटी एक्ट- 66 डी
थानों में हुई साइबर ठगी की एफआईआर….आईटी एक्ट गायब
- मुरार – रमेश भदौरिया- वाट्सएप एपीके फाइल से पांच लाख की ठगी- बीएनएस 318(4)
- गोला का मंदिर – ब्रिजेश बैस- 1.65 लाख रुपये की ठगी- बीएनएस 318(4)
- थाटीपुर – विजयपाल जादौन- 87 हजार 352 रुपये की ठगी- बीएनएस 318(4)
- थाटीपुर – उदित रायजादा- 1.94 लाख रुपये की ठगी- बीएनएस 318(4)
- पुरानी छावनी – किशन उचिया- 1.99 लाख रुपए- बीएनएस 318(4), बीएनएस319(2), बीएनएस 308
- महाराजपुरा – संदीप राजावत- 98 हजार रुपये की ठगी- बीएनएस 318(4), 319(2)
आईटी एक्ट इसलिए जरूरी
कानून के विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी काल, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, एपीके फाइल भेजकर रकम ऐंठने जैसे मामलों में आईटी एक्ट की धारा अनिवार्य है। आइटी एक्ट गैर-जमानती अपराध है। आसानी से ऐसे मामलों में कोर्ट से जमानत नहीं मिलती।
जबकि सामान्य धोखाधड़ी के मामले में सात साल और इससे कम वर्ष की सजा के कारण अक्सर आरोपित को नोटिस देकर ही छोड़ दिया जाता है। आईटी एक्ट दर्ज होने पर जांच निरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी को करनी होती है क्योंकि इसमें तकनीकी जांच, जवाबदेही अधिक होती है। जबकि सामान्य धोखाधड़ी में एफआईआर की जांच एसआई या हवलदार स्तर पर ही छोड़ दी जाती है।
क्या कहती हैं धाराएं
- धारा 318(4) बीएनएस : सामान्य ठगी से जुड़ी धारा है। झूठे वादे, निवेश, लोन या नौकरी के नाम पर ठगी में इसका उपयोग हो सकता है।
- धारा 319(2) बीएनएस : फर्जी पहचान से अपराधी पुलिस, बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर ठगी करता है, तब लगाई जाती है।
- धारा 66-डी (आईटी एक्ट) : यह डिजिटल और ऑनलाइन ठगी की धारा है। इसमें बैंक खाते फ्रीज करना, आईपी एड्रेस, सीडीआर, सर्वर डेटा की जांच अनिवार्य होती है।
आईटी एक्ट की धारा लगनी चाहिए
साइबर अपराध के मामले में ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो रही है। आईटी एक्ट की धारा लगनी चाहिए। जिससे अपराधी पर नकेल कसी जा सके और दोषसिद्ध हो सके। – अरविंद सक्सेना, आईजी, ग्वालियर रेंज।
