केंद्रीय चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों के बावजूद, शहर की मतदाता सूचियों में गंभीर खामियां बनी हुई हैं। नरेला विधानसभा क्षेत्र में विशेष मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के बाद भी, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां छोटे-छोटे मकानों में सैकड़ों मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। यह खुलासा जिला प्रशासन की कार्रवाई पर कांग्रेस द्वारा गंभीर सवाल उठाने के बाद हुआ है।
छोटे मकानों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम
जानकारी के अनुसार, नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 75 के बूथ क्रमांक 63 में, 1500 वर्गफीट के एक मकान में 37 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। इसी बूथ के मकान नंबर 10 पर, 800 वर्गफीट के एक पते पर 36 मतदाता सूचीबद्ध हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला मकान नंबर 21 का है, जहां केवल 600 वर्गफीट के एक छोटे से मकान में 43 फर्जी मतदाताओं के नाम मिले हैं। ये सभी मतदाता अलग-अलग जातियों के बताए जा रहे हैं।
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कांग्रेस ने उठाए सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग
करौंद इलाके में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के बाद भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आने के बाद, कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। शुक्ला ने जिला निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शुद्धिकरण अभियान के बाद भी मतदाता सूचियों में ऐसी अशुद्धियां पाई जाती हैं, तो यह शासकीय कार्य में गंभीर लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
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चुनाव आयोग और जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
यह घटनाक्रम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मतदाता सूची में इस प्रकार का फर्जीवाड़ा न केवल चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को कमजोर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर अभी भी बड़ी खामियां मौजूद हैं। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे ऐसी गड़बड़ियों को रोकें और सुनिश्चित करें कि प्रत्येक मतदाता का नाम सही पते पर और एक ही बार दर्ज हो। कांग्रेस की मांग पर यदि उच्च स्तरीय जांच होती है, तो संभव है कि ऐसे और भी कई मामले उजागर हों और भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाए जा सकें।
