इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 25 मौत के बाद प्रदेश में जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के उद्देश्य से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा ‘अमृत रेखा’ मोबाइल एप के माध्यम से जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया है। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए अब पेयजल से जुड़े सभी संसाधनों की सटीक मैपिंग और मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था से जल आपूर्ति प्रणाली पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही नागरिकों को पानी की गुणवत्ता को लेकर जागरूक किया जाएगा, ताकि वे स्वयं भी निगरानी और शिकायत प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें। नई व्यवस्था के तहत पेयजल पाइपलाइन, पानी की टंकियों और सीवर लाइनों की जीआईएस मैपिंग तीन अलग-अलग माध्यमों से की जाएगी। उपलब्ध डिजिटल फाइलों के आधार पर, पुराने नक्शों को डिजिटाइज कर तथा फील्ड में जाकर मोबाइल एप से जियो-टैगिंग के जरिए डेटा को अपडेट किया जाएगा। इससे जल परिसंपत्तियों का वास्तविक और सटीक रिकॉर्ड तैयार होगा।

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फील्ड इंजीनियर करेंगे सीधे एंट्री

‘अमृत रेखा’ एप के माध्यम से फील्ड इंजीनियर मौके पर ही लॉग-इन कर जल आपूर्ति से जुड़ी परिसंपत्तियों की मैपिंग, पानी के नमूनों की जियो-टैगिंग और निरीक्षण रिपोर्ट दर्ज कर सकेंगे। जियो-फेंसिंग जैसी सुविधाओं से यह सुनिश्चित होगा कि डेटा वास्तविक स्थल से ही अपलोड किया गया है।

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वेब प्लेटफॉर्म से रिपोर्ट और विश्लेषण

सिस्टम के वेब एप्लीकेशन के जरिए यूजर लॉग-इन, भूमिका निर्धारण, फाइल अपलोड, रिपोर्ट तैयार करने और मैप किए गए डेटा का विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे शहरी निकाय स्तर पर जल आपूर्ति व्यवस्था की स्थिति को एक ही प्लेटफॉर्म पर देखा और समझा जा सकेगा।

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पानी की गुणवत्ता पर विशेष फोकस

इस पहल के तहत जल शोधन संयंत्रों, पेयजल टंकियों और वितरण नेटवर्क की नियमित सफाई और जांच की जाएगी। साथ ही सतही और भू-जल स्रोतों से लिए गए नमूनों की गुणवत्ता का परीक्षण कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिससे जलजनित बीमारियों की रोकथाम हो सके।



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