मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण केवल ईंट-पत्थरों का जोड़ नहीं, बल्कि एक सृजनात्मक कला है। हर परियोजना में उत्कृष्ट दृष्टिकोण और दीर्घकालिक कार्ययोजना अपनाना जरूरी है। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखना समय की मांग है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं को नई ऊर्जा देती हैं और कौशल को परिष्कृत करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, नवाचार और दीर्घकालिक सोच को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से अधोसंरचना विकास को नई दिशा मिली है। वर्तमान समय में इंजीनियर्स भगवान विश्वकर्मा के साक्षात अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन निर्माण जैसे बड़े कार्य विभाग की जिम्मेदारी हैं और इन्हें आधुनिक दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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कार्यक्रम में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) 2.0 पोर्टल का शुभारंभ किया गया। साथ ही मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के ब्रोशर और मैनुअल का विमोचन हुआ। पीडब्ल्यूडी की प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर, रोड नेटवर्क मास्टर प्लान और बजट मॉड्यूल भी जारी किए गए। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और भवन विकास निगम ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (नई दिल्ली), इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, आईआईटी मुंबई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

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लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विभाग की सुधार यात्रा का महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि 293 इंजीनियर पदों को भरने की स्वीकृति मिल चुकी है। 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रशिक्षण शुरू किया गया है। विभाग ने औचक निरीक्षण व्यवस्था भी लागू की है, जिसे अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अधोसंरचना विकास तेजी से किया जा रहा है। प्रशिक्षण अब विभागीय कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन चुका है। कार्यशाला में लगभग दो हजार अभियंता और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए। राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ग्रीन बिल्डिंग, आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया।



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