नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बिलौआ में खदान संचालन को लेकर हुई गोलीबारी में पुलिस आरोपितों को काली स्कॉर्पियो में बैठाकर मेडिकल कराने सरकारी अस्पताल पहुंची। इसे लेकर बिलौआ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब इस संबंध में मेडिकल कराने पहुंचे दारोगा राजवीर सिंह यादव से बात की गई तो बोले- सरकारी गाड़ी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए किराये की गाड़ी से आरोपितों को लेकर गए थे।
जब उनसे किराया और गाड़ी किराये पर देने वाली एजेंसी का नाम पूछा तो चुप्पी साध गए। एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो रहा है।
समर्थकों ने एक-दूसरे पर फायरिंग की थी
बिलौआ में खदान संचालन को लेकर शनिवार दोपहर संदीप शर्मा और माेहित शर्मा में आमने-सामने गोलियां चली थी। इनके समर्थकों ने एक-दूसरे पर फायरिंग की थी। पहले खदान के अंदर फिर सड़क पर गोलीबारी हुई। इस मामले में पुलिस अब तक छह आरोपित पकड़ चुकी है। जिसमें संदीप शर्मा, रोशन शर्मा, गौरव शर्मा, नीतेश शर्मा, आशु पाराशर, मोहित शर्मा को गिरफ्तार किया है।
अपराधियों का मेडिकल होना था
गौरव और मोहित को पुलिस काली स्कार्पियो एमपी07 जेडएल 8924 में बैठाकर सरकारी अस्पताल ले गई। यहां अपराधियों का मेडिकल होना था। यह गाड़ी पुलिस की नहीं बल्कि निजी थी। इसे लेकर पुलिस पर आरोपितों को वीवीआइपी ट्रीटमेंट देने के आरोप लग रहे हैं।
