MP Weather Update: ग्वालियर-चंबल अंचल में मौसम एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ाने वाला है। तीन फरवरी को सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण भितरवार क्ष …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 05 Feb 2026 02:53:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Feb 2026 02:53:56 AM (IST)

MP Weather: पश्चिमी विक्षोभ से फिर बदलेगा मौसम, IMD ने बारिश और ओलावृष्टि का दिया अलर्ट, फसलों पर मंडराया संकट
ग्वालियर-चंबल अंचल में मौसम फिर करवट लेने जा रहा है। (AI Generated Image)

HighLights

  1. कृषि रक्षक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
  2. भितरवार क्षेत्र में पहले हो चुकी ओलावृष्टि
  3. कृषि विभाग ने जारी की किसानों के लिए सलाह

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: तीन फरवरी को सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के असर से भितरवार क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई थी और फसलों को नुकसान पहुंचा था। लेकिन आगामी एक सप्ताह में दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं।

इनकी वजह से न केवल बादल छा सकते हैं, बल्कि वर्षा के साथ ओलावृष्टि होने का भी अंदेशा है। ऐसे में आगामी दिनों में अंचल की फसलों के लिए संकट बना ही रहेगा। कृषि विशेषज्ञों की माने तो इस प्राकृतिक गतिविधि को रोक नहीं सकते। लेकिन कुछ उपाय करने से प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई कर सकते हैं।

यह होता है पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने का मतलब होता है, भूमध्यसागर क्षेत्र से उठी नमी वाली ठंडी हवाओं का उत्तर भारत की ओर आना। इसका असर खास तौर पर मध्य प्रदेश, ग्वालियर-चंबल, राजस्थान, दिल्ली, यूपी और पहाड़ी राज्यों में दिखता है। इसके सक्रिय होते ही हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। ग्वालियर-चंबल जैसे इलाकों में अक्सर बूंदाबांदी या हल्की वर्षा, कभी भी ओलावृष्टि हो जाती है, जिससे मौसम बदल जाता है।

हर तीन दिन में सक्रिय हो रहे हैं पश्चिमी विक्षोभ, यह हो रहा है असर

  • 26 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ तो 27-28 जनवरी को अंचल में रिकार्ड तोड़ वर्षा हुई।
  • 30 जनवरी को फिर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ तो ग्वालियर-अंचल में बादल छाए और कहीं कहीं पर वर्षा हुई।
  • दो फरवरी को फिर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ तो तीन फरवरी को भितरवार क्षेत्र में ओलावृष्टि हुई।
  • पांच व आठ फरवरी को नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाले हैं। ऐसे में छह फरवरी से 12 फरवरी के बीच मौसम में काफी उतार-चढ़ाव रहेगा।

फसलों पर क्या होगा असर

पश्चिमी विक्षोभों के असर से अंचल में बादल छा सकते हैं और हल्की वर्षा हो सकती है। साथ ही ओलावृष्टि की भी संभावना बन सकती है। ऐसे में वर्षा से तो फसलों में नुकसान नहीं होगा, लेकिन ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है।

फसलों में हुए नुकसान की भरपाई इस तरह कर सकते हैं

  • जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है वे आपदा आने के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को अनिवार्य रूप से सूचना दें। जिससे समय पर नुकसान की भरपाई हो सके।
  • कृषि रक्षक पोर्टल के माध्यम से 14447 पर काल कर सकते हैं। या लिखित रूप में संबंधित बैंक, कृषि विभाग व बीमा कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधि को सूचना दें।
  • किसी किसान की फसल पूर्ण नष्ट हो गई है, तो वह वैकल्पिक फसल के रूप में ग्रीष्मकालीन तिल, उड़द अथवा मूंगफली की बुवाई कर सकते है, जिससे प्राकृतिक आपदा से हुए आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई संभव हो सके।

क्या कहते हैं कृषि विभाग के अफसर

वर्तमान में जिले व आसपास के क्षेत्रों में जो मौसम है, वह काफी संवदेनशील है। आगामी कुछ दिनों तक भी ऐसा रह सकता है। प्राकृतिक गतिविधि को रोक तो नहीं सकते हैं, लेकिन इसके लिए विभाग ने किसानों को कुछ उपाय बताए हैं। आपदा के बाद उन्हें करने से कुछ हद तक नुकसान की भरपाई जरूर की जा सकती है।

-आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि विकास व किसान कल्याण विभाग।



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