मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने एक हैबियस कार्पस याचिका में 19 वर्षीय यु …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 05 Apr 2026 08:13:57 AM (IST)Updated Date: Sun, 05 Apr 2026 08:15:44 AM (IST)

पति से 21 साल छोटी पत्नी ने प्रेमी के साथ जाने की इच्छा जताई तो हाई कोर्ट ने दी परमिशन, 'शौर्या दीदी' की भी नियुक्ति
ग्वालियर हाईकोर्ट ने 19 वर्षीय युवती को प्रेमी के साथ जाने की दी अनुमति (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. ग्वालियर हाईकोर्ट ने 19 वर्षीय युवती को प्रेमी के साथ जाने की दी अनुमति
  2. अगले छह माह तक दो महिला पुलिसकर्मियों को नियुक्त किया गया है
  3. युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है और किसी अवैध बंधन में नहीं है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने एक हैबियस कार्पस याचिका में 19 वर्षीय युवती की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए उसे अपने प्रेमी अनुज के साथ रहने की अनुमति दे दी। साथ ही उसकी सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए अगले छह माह तक दो महिला पुलिसकर्मियों को शौर्या दीदी नियुक्त किया है।

यह याचिका अवधेश की ओर से अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने दायर की थी। आरोप था कि उसकी पत्नी को अनुज ने अवैध रूप से अपने पास रखा है। मामले में युवती को वन स्टॉप सेंटर से सब इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कांस्टेबल अखिलेश सेंथिया और लेडी कांस्टेबल भावना द्वारा कोर्ट में पेश किया गया। युवती के माता-पिता, पति अवधेश और प्रेमी अनुज भी कोर्ट में मौजूद रहे।

युवती बोली कि वह किसी अवैध बंधन में नहीं है

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती से उसकी इच्छा पूछी। युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है, किसी अवैध बंधन में नहीं है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने पति और अपने माता-पिता दोनों के साथ रहने से इनकार कर दिया। युवती ने बताया कि पति की उम्र करीब 40 वर्ष है, जबकि उसकी उम्र 19 साल है, 21 वर्ष का अंतर होने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाया और उसके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कोर्ट के कहने पर शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने युवती की काउंसलिंग की।

काउंसलिंग के बाद भी युवती ने प्रेमी अनुज के साथ रहने की इच्छा दोहराई। अनुज ने भी कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह युवती की पूरी देखभाल करेगा और किसी तरह की प्रताड़ना नहीं देगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका का उद्देश्य समाप्त हो चुका है।



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