मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने एक फैसले में कहा कि पति-पत्नी के बीच अप्राकृतिक संबंध पर धारा 377 प्रभावी …और पढ़ें
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HighLights
- ग्वालियर हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच धारा 377 के आरोप को किया खत्म
- दहेज प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों पर जारी रहेगी सुनवाई
- कोर्ट ने 2013 के संशोधन और धारा 375 के कानूनी अपवाद का दिया हवाला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने एक फैसले में कहा कि पति-पत्नी के बीच अप्राकृतिक संबंध पर धारा 377 प्रभावी नहीं होगी। कोर्ट ने धारा 377 को खत्म करने का आदेश दिया, जबकि दहेज प्रताड़ना व अन्य आरोपों में केस जारी रहेगा। जानकारी के अनुसार भिंड जिले की एक महिला की शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के समय उसके परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार करीब चार लाख रुपये नकद, सोने के आभूषण और घरेलू सामान दिया।
6 लाख और मोटरसाइकिल की मांग
इसके बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और छह लाख रुपये तथा मोटरसाइकिल की मांग करने लगा। महिला का आरोप है कि इन मांगों को लेकर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसके साथ जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाए। ससुर ने लाइसेंसी बंदूक से जान से मारने की धमकी दी। बाद में उसे घर से निकालकर मायके में छोड़ दिया गया।
दुष्कर्म की धारा 375 और 377 का अंतर
कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच बने यौन संबंधों पर धारा 377 लागू नहीं होती। 2013 के संशोधन के बाद ऐसे मामलों को धारा 375 (दुष्कर्म) के तहत देखा जाता है, जिसमें पति-पत्नी के संबंधों को लेकर एक कानूनी अपवाद भी है। इसी आधार पर पति के खिलाफ धारा 377 का आरोप भी खत्म कर दिया गया। हालांकि, अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
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