प्रदेश में राज्यसभा चुनाव तैयारियों के बीच भाजपा ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने हेतु पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने या दतिया उपचु …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 04 Apr 2026 09:48:24 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Apr 2026 09:48:24 AM (IST)

नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने पर मंथन, अंचल में सवर्णों की नाराजगी दूर करने की कोशिश में भाजपा
पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजा सकता है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों में मंथन तेज जारी
  2. नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक पुनर्वास पर चर्चा संगठन स्तर शुरू
  3. ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने भाजपा रणनीति बनाने जुटी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं। विधानसभा संख्या बल के अनुसार दो सीटें सत्तारूढ़ दल व एक सीट कांग्रेस के खाते की हैं। दोनों दलों में राज्यसभा की उम्मीदवारी को लेकर मंथन चल रहा है। वर्तमान में अंचल से कांग्रेस से अशोक सिंह राज्यसभा सदस्य हैं।

दूसरी तरफ यूजीसी अधिनियम से ऐसे राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, जिनसे राज्यसभा के लिए पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी पर चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में पराजित होने के बाद संगठन में उनके राजनीतिक पुनर्वास को लेकर पहले से मंथन चल रहा है।

संगठनस्तर पर चर्चा है कि यूजीसी अधिनियम को लेकर सवर्णों विशेषकर अंचल के ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने के लिए पूर्व गृहमंत्री को राज्यसभा भेजा सकता है, क्योंकि वे अंचल में ही नही प्रदेश में भी ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और फिर यूजीसी के विरोध का केंद्र भी अंचल बना हुआ है।

पूर्व गृहमंत्री सक्रिय राजनीति में लाने के लिए संगठन के सामने दूसरा विकल्प दतिया विधानसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव है। उन्हें एक बार फिर दतिया से चुनाव लड़ाकर प्रदेश सरकार में सम्मानजनक स्थान दिया जा सकता है। शीर्ष नेतृत्व नरोत्तम मिश्रा से जुड़ी तमाम संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने का रास्ता तलाश रही है भाजपा

  • यूजीसी एक्ट को लेकर भाजपा को सवर्ण समाज के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर ग्वालियर-चंबल अंचल जातिगत राजनीति गरमाई हुई है।
  • यूजीसी अधिनियम को लेकर अंचल का ब्राह्मण समाज भाजपा के खिलाफ मुखर होकर सामने आ गया है। अनुसूचित वर्ग और पिछड़े वर्ग को साधने के साथ सवर्ण समाज की नाराजगी के साथ नगरीय निकाय चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जाना भाजपा के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। इसलिए चुनाव की गतिविधियां शुरू होने से पहले सवर्ण समाज की नाराजगी को दूर करने की भाजपा हर संभव कोशिश करेगी।

विधानसभा चुनाव के लिए किया जा सकता है आरक्षित

  • दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में तीन वर्ष की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता पर तलवार लटक गई है। दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने की अटकले लगना शुरू हो गई हैं। शीर्ष नेतृत्व में इस बात पर चर्चा चल रही है कि फिलहाल नरोत्तम मिश्रा के नाम को आरक्षित कोटे में रखा जाये।
  • अगर उच्च न्यायालय के फैसले से दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की कोई संभावना बनती हैं तो नरोत्तम मिश्रा से बेहतर कोई नाम नहीं है। चुनाव में जीताने के बाद उन्हें डा. मोहन यादव की सरकार में पूर्व के भांति कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाए, क्योंकि पिछले एक दशक से सरकार में उनकी भूमिका संकट मोचक की रही है। लेकिन मामला कोर्ट के अधीन होने के कारण इसमें अभी और समय लग सकता है।

नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने पर विचार

सवर्ण वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नरोत्तम मिश्रा का राज्यसभा भेजने का दांव चल सकती है। यह अलग बात है कि भाजपा का यह दांव जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजकर सवर्णों के राजनीतिक गुस्से को ठंडा किया जा सकता है। फिर यूजीसी पर अब फैसला कोर्ट से आना है, जिसका सभी को इंतजार है।



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