नए साल में फ्रिज और एसी खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। क्योंकि सरकार ने एसी, फ्रिज आदि उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग अनिवार्य कर दी है। साथ ही ब् …और पढ़ें

HighLights
- एसी और फ्रिज की कीमतों में लगी आग
- 1 जनवरी से लागू हुई ‘अनिवार्य स्टार लेबलिंग’
- कॉपर और स्टील के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा बजट
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। नए साल में फ्रिज और एसी खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। क्योंकि सरकार ने एसी, फ्रिज आदि उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग अनिवार्य कर दी है। साथ ही ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी द्वारा स्टार रेटिंग के मानकों में किए गए बड़े बदलावों से कंपनियों ने इन उपकरणों की कीमतों में पांच से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।
दरअसल, नए ऊर्जा नियमों के तहत पुराने फाइव-स्टार माडल अब केवल फोर-स्टार रेटिंग की श्रेणी में आ गए हैं। नया फाइव स्टार टैग हासिल करने के लिए कंपनियों को और अधिक उन्नत तकनीक और महंगे कंपोनेंट्स का उपयोग करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, कापर और स्टील जैसे कच्चे माल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों ने भी दामों में आग लगा दी है। यदि आप भी नए साल में कूलिंग गैजेट्स लेने की सोच रहे हैं, तो ‘रिवाइज्ड रेटिंग’ और बढ़े हुए बजट के लिए तैयार रहें।
क्या होती है स्टार रेटिंग?
स्टार रेटिंग एक से पांच तक होती है। इसका सीधा मतलब है- जितने ज्यादा स्टार, उतनी कम बिजली का बिल।
- वन स्टार: यह सबसे कम कुशल होता है और सबसे ज्यादा बिजली खाता है।
- थ्री स्टार: यह मध्यम बजट और बचत का संतुलन है।
- फोर स्टार: रेटिंग वाला उपकरण थ्री स्टार के मुकाबले काफी कम बिजली खाता है।
- फाइव स्टार: यह सबसे आधुनिक तकनीक (जैसे इनवर्टर कंप्रेसर) से लैस होता है और बिजली की भारी बचत करता है।
एक फाइव स्टार फ्रिज वन स्टार के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत तक कम बिजली खर्च कर सकता है। एक जनवरी 2026 से बढ़ी कीमतें नए साल की शुरुआत के साथ फ्रिज और एसी की कीमतों में पांच से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं
- नए और कड़े स्टार रेटिंग मानक: ब्यूरो आफ एनर्जी एफिशिएंसी हर कुछ वर्षों में अपने मानकों को अपडेट करता है। एक जनवरी से नए नियम लागू हुए हैं। अब जो पहले फाइव स्टार एसी था, वह नए नियमों के हिसाब से अब केवल चार स्टार रह गया है। नया फाइव स्टार रेटिंग पाने के लिए कंपनियों को और भी बेहतर और महंगे कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस ‘टेक्नोलाजी अपग्रेड’ की वजह से लागत बढ़ गई है।
