नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कलेक्ट्रेट स्थित रिकार्ड रूम में खसरा-नक्शा की जल्द नकल देने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में कलेक्टर रुचिका चौहान ने कड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को महिला बाबू सहायक वर्ग-तीन सुमन कुशवाह और बाबू तक आवेदकों को पहुंचाने वाली महिला पटवारी बीना शिवहरे को निलंबित कर दिया गया। दोनों कर्मचारी तहसील कार्यालय ग्वालियर के रिकार्ड रूम में पदस्थ थे।
कलेक्ट्रेट की तीसरी मंजिल स्थित नकल शाखा में खुलेआम रिश्वत मांगे जाने के खुलासे के बाद पूरे कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस मामले की व्यापक चर्चा रही। कलेक्टर ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए तत्काल निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि के दौरान दोनों को कलेक्ट्रेट की भू-संसाधन प्रबंधन शाखा में अटैच किया गया है।
नईदुनिया-खबर का असर
उल्लेखनीय है कि नईदुनिया ने गुरुवार के अंक में प्रथम पृष्ठ पर “कलेक्ट्रेट की शाखा से जल्द नकल चाहिए तो हजार रुपये नगद लाइये” शीर्षक से विस्तृत पड़ताल प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह तहसील कार्यालय के रिकार्ड रूम में पदस्थ महिला पटवारी बीना शिवहरे ने आवेदक को महिला बाबू सुमन कुशवाह तक पहुंचाया। इसके बाद सुमन कुशवाह ने रिकॉर्डिंग के दौरान जल्द नकल देने के एवज में एक हजार रुपये की मांग की। राशि कम करने की बात कहने पर उसने इंकार किया और खुद फार्म भरवाया। अगले दिन मोबाइल पर बातचीत में दो नकल के लिए दो हजार रुपये भेजने पर सहमति बनी।
निलंबन आदेश में कारण दर्ज
निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि रिकार्ड रूम में पदस्थ पटवारी बीना शिवहरे और सहायक वर्ग-तीन सुमन कुशवाह द्वारा राजस्व दस्तावेज की तुरंत नकल दिलाने के नाम पर रुपये मांगे गए, जिससे प्रशासन की छवि धूमिल हुई है। तहसील कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में यह भी दर्ज था कि जिला अभिभाषक संघ ने सुमन कुशवाह के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था। कलेक्टर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण एवं अपील) नियमों के तहत दोनों कर्मचारियों को निलंबित करने के अलग-अलग आदेश जारी किए हैं।
शासकीय भूमि को निजी बताने का मामला
इधर, ग्राम गुरार स्थित शासकीय भूमि को निजी बताकर गलत रिपोर्ट देने के मामले में जांच के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने पटवारी राहुल दुबे को दोषी पाया है। दोष सिद्ध होने पर पटवारी को निलंबित कर दिया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार पटवारी राहुल दुबे ने 25 सितंबर 2025 को ग्राम मुरार में सर्वे क्रमांक 3689/1 रकबा 0.2690 हेक्टेयर शासकीय भूमि को अपनी रिपोर्ट में निजी बताया। रिपोर्ट में लिखा गया कि भूमि विक्रेता एवं अन्य के नाम भूमिस्वामी स्वत्व पर दर्ज है और यह पट्टे माफी औकाफ, भूदान या अन्य शासकीय श्रेणी में नहीं है। इसके आधार पर नामांतरण का प्रकरण तैयार किया गया।
कलेक्टर ने पटवारी से जवाब तलब किया
बाद में 14 नवंबर 2025 को दूसरी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि आदेश के अमल के दौरान पाया गया कि उक्त भूमि खसरे के खाना नंबर 12 में शासकीय दर्ज है और खाते की रिपोर्ट लगाते समय भूलवश ध्यान नहीं गया। मामला संज्ञान में आने पर कलेक्टर ने पटवारी से जवाब तलब किया। पटवारी ने जवाब में अपर कलेक्टर से अभिमत लेने की बात कही। इस पर अपर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि खसरों में सीलिंग अंकित होने के बावजूद बिना परीक्षण नामांतरण प्रस्ताव भेजा गया।
