धार की भोजशाला में सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष पूजा कर रहा है। यह सूर्यास्त तक चलेगी। वहीं, दोपहर में 1 से 3 बजे तक भोजशाला परिसर में ही मुस्लिम समाज नमाज भी अदा करेगा। बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज एक ही दिन होगी। इस मौके पर किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने धार को छावनी में तब्दील कर दिया है।

ऐसे में भोजशाला मामले को लेकर मुस्लिम पक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा के लिए जिला प्रशासन ने बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी पक्षों से बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय में भाईचारा है और कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

शहर काजी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मुस्लिम समाज की ओर से कोई याचिका दायर नहीं की गई थी। विष्णु जैन द्वारा इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन (IA) दाखिल की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुस्लिम पक्ष ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन किया जाए और न्यायालय की मंशा के अनुरूप कार्रवाई हो।

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उन्होंने बताया कि अभी केवल प्रारंभिक बातचीत हुई है। आगे एक और दौर की चर्चा होगी, जिसमें समाज के वरिष्ठ वकील भी शामिल होंगे। फिलहाल किसी तरह की सूची प्रशासन को नहीं सौंपी गई है। जगह तय करने के सवाल पर शहर काजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्थान तय करने की जिम्मेदारी प्रशासन को दी है। इसकी व्याख्या और आगे की प्रक्रिया के बारे में जिला प्रशासन ही जानकारी देगा।

शहर काजी वकार शादिक ने कहा कि मुस्लिम समाज सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट है और उसे विश्वास है कि मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन आदेश का पालन करेगा, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह आदेश नया नहीं है, बल्कि 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय दिए गए निर्देशों की पुनरावृत्ति है, जिसका सभी पालन करेंगे।



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