मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही कंप्यूटर शिक्षा ठप होने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेशभर में कार्यरत करीब 6 हजार अतिथि कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की सेवाएं समाप्त होने की स्थिति बन गई है। समग्र शिक्षा (सेकेंडरी एजुकेशन) के लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल से जारी आदेश के मुताबिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की सेवाएं अब केवल 31 मार्च 2026 तक ही ली जाएंगी। पहले 30 अप्रैल तक सेवा जारी रखने के निर्देश थे, लेकिन 26 मार्च 2026 को जारी पत्र में इसे निरस्त कर दिया गया है। यह आदेश जिला शिक्षा अधिकारियों और परियोजना समन्वयकों को भेजा गया है।

पत्र में क्या कहा गया है

जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्वीकृत बजट केवल मार्च 2026 तक ही उपलब्ध है। वर्ष 2026-27 के लिए अभी तक भारत सरकार से कोई नई स्वीकृति या दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी कारण कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की सेवाएं 31 मार्च के बाद जारी रखना संभव नहीं होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि 31 मार्च के बाद यदि किसी विद्यालय में इंस्ट्रक्टर कार्यरत पाए जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी की होगी।

लाखों की लैब, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?

प्रदेश के स्कूलों में आईसीटी लैब पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। हर जिले में बड़ी संख्या में कंप्यूटर लैब स्थापित हैं। ऐसे में इंस्ट्रक्टर हटने के बाद इन लैब के संचालन, रखरखाव और तकनीकी देखरेख को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

यह भी पढ़ें- पीठ दर्द से परेशान मरीजों के लिए बड़ी राहत, एम्स में SPECT-CT से दर्द के कारणों की होगी सही जांच

डिजिटल पढ़ाई पर पड़ेगा सीधा असर

कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर के बिना छात्रों की डिजिटल शिक्षा प्रभावित होना तय है। कंप्यूटर विषय की पढ़ाई, प्रैक्टिकल और तकनीकी प्रशिक्षण पूरी तरह रुक सकता है, जिससे स्कूलों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ेगा। यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकला, तो नए शैक्षणिक सत्र से कई स्कूलों में ICT लैब पर ताला लग सकता है। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि डिजिटल शिक्षा के लिए किया गया निवेश भी बेकार जाने का खतरा है।

यह भी पढ़ें-महिला कांग्रेस का आरोप-भाजपा नेताओं पर कार्रवाई से क्यों बच रही सरकार?

अतिथि शिक्षकों ने उठाई आवाज

अतिथि कंप्यूटर इंस्ट्रक्टरों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार ने लाखों रुपए खर्च कर लैब तो बना दी, लेकिन अब उन्हें संचालित करने वाले ही हटा दिए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सेवाएं जारी रखी जाएं और लैब के रखरखाव की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *