नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल-अमेरिका) के बीच युद्ध की आंच आम जनता की जेब पर आना शुरू हो गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बाधित हुई ग्लोबल सप्लाई चेन का असर शहर के बाजारों में दिखने लगा है। नए वित्तीय वर्ष में ब्रेड, बिस्किट से लेकर जूते-चप्पल और प्लास्टिक उत्पाद तक 20 से 25 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं।

ऐसा इसलिए भी होगा क्योंकि 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होता है और एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होता है। ऐसे में कंपनियां अपने प्रोडक्ट की पैकिंग से लेकर अन्य चीजों में बदलाव करती हैं। ऐसे में नया स्टॉक आएगा तो वर्तमान परिस्थितियों की वजह से बढ़ी हुई कीमतें प्रोडक्ट की नई पैकिंग पर लिखी होंगी।

लागत में भारी उछाल

चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड आयल) पर आधारित केमिकल और रॉ मटेरियल की कीमतें 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से स्थानीय उद्योगों का संचालन महंगा हो गया है। कंपनियों के पास पुराना स्टॉक मार्च तक ही सीमित है, जिसके बाद अप्रैल से नए रेट कार्ड लागू होंगे।

महंगाई का नया चार्ट: क्या-क्या होगा महंगा?

अप्रैल की पहली तारीख से दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में संभावित बढ़ोतरी इस प्रकार है।

वस्तु संभावित बढ़ोतरी नया रेट (अनुमानित) ब्रेड (400 ग्राम)- पांच से छह रुपये महंगा- 35-40 रुपये

बिस्किट (छोटा पैकेट)- एक से दो रुपये महंगा- पांच रुपये वाला पैकेट छह रुपये में

चप्पल/जूते- 20 से 30 रुपये महंगा- 100 रुपये वाली चप्पल 120-130 रुपये में

प्लास्टिक उत्पाद- 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक वृद्धि

दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर सीधा असर

ब्रेड-बिस्किट: युद्ध से पहले जो पीपी प्रोडक्ट 90-95 रुपये प्रति किलो था, वह अब 170 के पार पहुंच गया है। इसका असर बेकरी उत्पादों पर पड़ रहा है। कुछ कंपनियों ने वजन घटाकर (जैसे 10 ग्राम की चॉकलेट को सात से आठ ग्राम कर) मार्जिन बचाने की कोशिश की है।

सर्फ और साबुन: डिटर्जेंट बनाने का मुख्य कच्चा माल एसिड स्लरी है, जो कच्चे तेल से बनता है। खाड़ी देशों में तनाव के कारण इसकी उपलब्धता कम और दाम ज्यादा हो गए हैं, जिससे सर्फ के हर पैकेट पर 15-20 प्रतिशत का बोझ बढ़ेगा।

फुटवियर इंडस्ट्री: ग्वालियर और आसपास की आर्टिफिशियल लेदर फुटवियर इंडस्ट्री पूरी तरह पेट्रोकेमिकल पर निर्भर है। रॉ मटेरियल 50 प्रतिशत तक महंगा होने से फिनिश गुड्स के दाम 20-25 प्रतिशत बढ़ना तय है।

सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स की चुनौती

बानमोर पैकेजिंग के सुदीप शर्मा के मुताबिक, शहर के बाजारों में आने वाला प्लास्टिक इनपुट और पालिमर महंगा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने पीवीसी 13 हजार रुपये प्रति टन और कोपालिमर सात हजार रुपये प्रति टन तक महंगा हो चुका है। ऐसे में प्लास्टिक की बोतलों के साथ साथ विभिन्न चीजों को पैकिंग करने वाली सामग्री भी महंगी हो गई है।

खाने पीने की चीजों पर तो एक अप्रैल से पहले ही असर

शहर के बाजार में पैकिंग वाली चीजों पर बेशक महंगाई एक अप्रैल के बाद दिखाई दे, लेकिन खाने पीने की चीजों पर एलपीजी की कमी का असर दिखाई दे रहा है, क्योंकि पोहे की जो प्लेट पहले 20 रुपये में आती थी वह 30 रुपये की हो गई है। इसी तरह शहर में स्ट्रीट फूड यानी मोमोस, छोले भटूरे व खाने की थाली पर सीधे-सीधे 20 रुपये बढ़ गए हैं। स्ट्रीट फूड वालों ने तो अपने ठेलों व दुकानों पर प्रिंट लगाकर एलपीजी संकट को दिखाकर प्राइस बढ़ाने के पोस्टर भी चिपका दिए हैं।

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छह महीने में ही फूटा जीएसटी से मिली राहत का गुब्बारा

22 सितंबर 2025 से सीएसटी कम कर दिया गया था। इससे महंगाई पर रोक लगी थी। लेकिन राहत का यह गुब्बारा छह महीने तक ही चल सका। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से सभी चीजों पर महंगाई आ रही हैं। इससे जीएसटी से मिली राहत तकरीबन खत्म हो गई है।



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