प्रदेश के 25 जिला उपभोक्ता आयोगों में से सात में अध्यक्ष रिक्त हैं। चंबल क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित है। अतिरिक्त प्रभार के कारण 21 हजार से अधिक मामले ल …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 04 Mar 2026 11:58:46 AM (IST)Updated Date: Wed, 04 Mar 2026 11:58:46 AM (IST)

जिला उपभोक्ता आयोगों में अध्यक्षों की कमी, चंबल सर्वाधिक प्रभावित
जिला उपभोक्ता आयोगों में अध्यक्षों की कमी

HighLights

  1. सात आयोगों में अध्यक्ष पद रिक्त
  2. चंबल अंचल सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र
  3. एक अध्यक्ष पर कई जिलों का भार

वरुण शर्मा, नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए गठित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग इन दिनों अध्यक्षों की कमी से जूझ रहे हैं। प्रदेश में कुल 25 आयोग संचालित हैं, लेकिन इनमें से सात जिलों में अध्यक्ष के पद रिक्त हैं। स्थिति यह है कि एक ही अध्यक्ष को एक से अधिक जिलों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है और लंबित प्रकरणों की संख्या बढ़ती जा रही है।

विधानसभा में जौरा से विधायक पंकज उपाध्याय द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्वीकार किया कि चंबल अंचल के भिंड, मुरैना और श्योपुर जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं। इसके अलावा बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में भी अध्यक्ष का पद खाली है।

चंबल में ज्यादा असर

अध्यक्षों की कमी का सबसे अधिक असर चंबल संभाग में देखने को मिल रहा है। ग्वालियर के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा को दतिया और श्योपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह इंदौर और जबलपुर में भी अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं।

21 हजार से अधिक मामले लंबित

प्रदेशभर में वर्ष 2025 तक कुल 21,526 मामले लंबित हैं। ग्वालियर में 981, मुरैना में 561, भिंड में 107 और इंदौर-एक में 1600 प्रकरण लंबित हैं। अध्यक्षों की कमी से इन मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है।

नियुक्ति की प्रक्रिया

अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए राज्य शासन के समक्ष शारीरिक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, शपथ-पत्र तथा पद और गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्ति प्रभावी मानी जाती है।



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