इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी से हुई मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को पांच माह के अव्यान साहू की मौत हो गई। इसके अलावा एक बुर्जुग की मौत भी हुई है।बुधवार को भी नए मरीज सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 1100 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। भागीरथपुरा में बुधवार को कुछ अन्य मौतें भी हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौत की वजह डायरिया नहीं मान रहा है। अब तक जहरीले पानी से 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत के चार नए मामले बुधवार को सामने आए है।  

 

बुधवार को पांच माह के बच्चे अव्यान की मौत ने बस्तीवालों को आक्रोशित कर दिया। अव्यान की मां का कहना था कि उनका बच्चा भी दूषित पानी का शिकार हुआ है। उसे बाहरी दूध पिलाया जाता था। उसमें पानी मिला होता था। उसे लगातार दस्त होते रहे। बुधवार को भी बस्ती में 100 से ज्यादा स्थानों पर पानी के सेंपल लिए गए और जांच के लिए भेजे। सुबह बस्ती में पानी की सप्लाई की गई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने नलों के पानी का सेवन पीने के लिए नहीं किया। टैंकरों से भी बस्ती में सप्लाई होती रही।

 

जहरीले पानी पर हाईकोर्ट में सुनवाई, स्टेटस रिपोर्ट मांगी

भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 12 लोगों की मौत के मामले में हाई कोर्ट में बुधवार को जनहित याचिका दायर की गई। हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट प्रशाासन से मांगी है।

जहरीले पानी के मामले में जनहित याचिका वकील रितेश इनानी ने दायर की है। एक अन्य याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी ने दायर की है। एडवोकेटयाचिका में इसमें दोषी अफसर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि आम आदमी की जान के साथ अफसरों ने लापरवाही की। मामले के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।कोर्ट ने सरकार से इस मामले की 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। एडवोकेट इनानी ने बताया कि कोर्ट ने पीड़ितों का निशुल्क इलाज करने के निर्देश भी दिए हैं।



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