मध्यप्रदेश में नए विश्वविद्यालयों के नामकरण को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तात्या टोपे और रानी अवंतीबाई लोधी को जनजातीय नायक बताए जाने पर आदिवासी कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि इससे न सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी हो रही है, बल्कि आदिवासी पहचान को भी कमजोर किया जा रहा है।
सीएम ने क्या कहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि प्रदेश में तीन नए विश्वविद्यालय क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (खरगोन), क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना) और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय (सागर)
जनजातीय नायकों की स्मृति में स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इसे शिक्षा के विस्तार और जनजातीय समाज के सम्मान से जोड़ा।
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भूरिया बोले इतिहास से खिलवाड़
आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री के बयान पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तात्या टोपे मराठा समाज से थे और रानी अवंतीबाई लोधी ओबीसी वर्ग से थीं, ऐसे में उन्हें आदिवासी नायक बताना गलत है। भूरिया ने आरोप लगाया कि गैर-आदिवासी नायकों के नाम पर जनजातीय स्मृति गढ़ी जा रही है, जो आदिवासी समाज के इतिहास और पहचान दोनों के साथ अन्याय है।
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असली जनजातीय नायकों को सामने लाए सरकार
भूरिया ने सरकार से मांग की कि अगर वास्तव में आदिवासी समाज को सम्मान देना है, तो बिरसा मुंडा, भीमा नायक, राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती जैसे जनजातीय नायकों को आगे लाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रचार नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ईमानदारी की जरूरत है।
