ग्वालियर में 1.41 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 29 Mar 2026 11:23:21 AM (IST)Updated Date: Sun, 29 Mar 2026 11:23:21 AM (IST)

ग्वालियर से ही चल रहा था म्यूल खातों का नेटवर्क, क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 1.41 करोड़ की साइबर ठगी
मनीष यादव और ईशु छारी की फाइल फोटो

HighLights

  1. फेसबुक-व्हाट्सएप से कारोबारी को जाल में फंसाया गया
  2. मजदूरों के खाते किराये पर लेकर ठगी को अंजाम
  3. टेलीग्राम के जरिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े आरोपी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: ग्वालियर के मुरार क्षेत्र में रहने वाले 70 वर्षीय कारोबारी दुर्गाशंकर नागर से साइबर ठगों ने 1.41 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर क्रिप्टो ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद अलग-अलग चरणों में उनसे बड़ी रकम जमा कराई गई। हालांकि पे-वॉलेट में मुनाफा दिखाई देता रहा, लेकिन कारोबारी रकम निकाल नहीं सके, जिससे ठगी का खुलासा हुआ।

म्यूल खातों का नेटवर्क ग्वालियर से संचालित

जांच में सामने आया कि इस ठगी के पीछे ग्वालियर के ही मनीष पुत्र केदार यादव (चार शहर का नाका) और ईशू पुत्र संगीत छारी (गोकुलधाम, शीलनगर, बहोड़ापुर) शामिल हैं। दोनों युवक म्यूल खातों का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। उन्होंने देवास और बड़वानी के युवकों को ग्वालियर बुलाकर उनके बैंक खाते खुलवाए और उसी दिन उन्हें होटल में ठहराया।

खुद करते थे खाते और सिम का इस्तेमाल

आरोपितों ने खाता धारकों से सिम कार्ड, एटीएम और पासबुक अपने कब्जे में ले ली। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद आरोपी खुद ही उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करते थे। बाद में इस राशि को यूएसडीटी के जरिए क्रिप्टो ट्रेडिंग में लगाकर विदेश भेज दिया जाता था। इसके बदले आरोपितों को करीब 2.50 लाख रुपये कमीशन मिला।

तकनीकी साक्ष्यों से गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी अमित शर्मा और एसआई धर्मेंद्र शर्मा की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सेंधवा निवासी अकरम खान और जुबरान खान के खातों की पहचान की। इनके खातों में पहली लेयर में 18 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। पूछताछ में इन दोनों ने मुख्य आरोपितों के नाम बताए, जिसके बाद पुलिस ने मनीष और ईशू को गिरफ्तार कर लिया।

टेलीग्राम से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम एप के जरिए अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों से जुड़े थे। चीन और कंबोडिया से इनसे म्यूल खातों की मांग की जाती थी। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेजा जाता था।

गरीब और मजदूर बने आसान निशाना

आरोपित मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें मामूली रकम का लालच देकर उनके बैंक खाते किराये पर ले लिए जाते थे और इन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया जाता था।



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