नईदुनिया प्रतिनिध, ग्वालियर। नल से आने वाला पानी भले ही देखने में साफ नजर आता हो, लेकिन उसमें मौजूद अदृश्य बैक्टीरिया और वायरस लोगों को बीमार कर रहे हैं। गजराराजा मेडिकल कॉलेज के जया आरोग्य अस्पताल में रोजाना उल्टी और दस्त से पीड़ित चार से पांच मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल मुरार की ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इनमें से करीब चार मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार, दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस ए और ई के हर सप्ताह दो मरीज सामने आ रहे हैं। इस संक्रमण की चपेट में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा आ रहे हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। हालांकि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद सरकारी अस्पतालों में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल किसी मरीज की हालत गंभीर नहीं है, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

दूषित पानी में छिपा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी में ई-कोलाई और साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया और हेपेटाइटिस ए व ई जैसे वायरस पाए जाते हैं। ये सीधे पाचन तंत्र और लीवर को प्रभावित करते हैं, जिससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

लापरवाही पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी पाइपलाइन, लीकेज और गंदे जलस्रोतों के कारण नल का पानी दूषित हो सकता है। ऐसे में बिना जांच या शुद्धिकरण के पानी पीना लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता है। लोगों को साफ दिखने वाले पानी पर भरोसा करने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। समय पर जागरूकता और सावधानी ही पेट संबंधी बीमारियों और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

मेहरा कॉलोनी में दूषित पानी पीने से बीमार हुए थे ढाई सौ लोग

सात साल पहले शहर के थाटीपुर इलाके की मेहरा कॉलोनी में 250 लोग गंदा पानी पीने से बीमार हुए थे। इनमें से छह की हालत गंभीर हुई थी। मरीजों को उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती किया गया था। चिकित्सकों का कहना है इसके बाद से अब तक इनती संख्या में एक साथ इतने मरीज बीमार नहीं हुए।

पानी की टंकियों की सफाई के लिए नई व्यवस्था

कलेक्टर ने लक्ष्मण तलैया स्थित पानी की टंकी का भी मुआयना किया। उन्होंने निर्देश दिए कि हर छह माह में अनिवार्य रूप से टंकियों की सफाई कराई जाए और टंकी के ऊपर सफाई की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की जाए। इसके अलावा, उन्होंने शीलनगर में डाली जा रही नई पाइपलाइन के कार्य को गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

घरों में जाकर परखी पानी की गुणवत्ता

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ निगमायुक्त संघ प्रिय और पीएचई विभाग का अमला मौजूद रहा। लक्ष्मण तलैया के नीचे डीपीएस स्कूल के पास रहने वाले रहवासियों से चर्चा करते हुए कलेक्टर ने घरों में पानी के सैंपल देखे। हालांकि, प्रशासन के पहुंचने से पूर्व विभाग ने समस्या का तकनीकी समाधान कर दिया था, जिससे निरीक्षण के दौरान पानी साफ मिला। कलेक्टर ने स्पष्ट लहजे में अधिकारियों को हिदायत दी कि पेयजल और सीवर जैसी मूलभूत समस्याओं के निराकरण में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सामुदायिक भवन के कायाकल्प के निर्देश

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने क्षेत्र के सामुदायिक भवन की जर्जर स्थिति देख उसकी रंगाई-पुताई और मरम्मत कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों के बंद होने का इंतजार न करें, बल्कि फील्ड में उतरकर समस्या को जड़ से खत्म करें।

विशेषज्ञों की सलाह : ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

डॉ. नीतेश मुदगल एमडी मेडिसिन ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है

  • नल के पानी को उबालकर या फिल्टर कर ही पिएं।
  • खुले में रखा पानी पीने से बचें।
  • हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
  • बाहर का कटे-फटे फल और खुले खाद्य पदार्थ न खाएं।
  • बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण दिखते ही डाक्टर से संपर्क करें।
  • अगर उल्टी, दस्त या पेट दर्द हो, तो उसे साधारण मानकर घर पर इलाज न करें।
  • तुरंत डॉक्टर के पास जाएं ताकि समय रहते उपचार शुरू हो सके।

कोई मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचा

राहत की बात यह है कि अभी तक कोई मरीज अति-गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचा है। पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त के शिकार चार से पांच मरीज तो रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं। जिनको उपचार दिया जाता है। – डॉ. संजय धवले, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, जया आरोग्य।



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