अमित मिश्रा, नईदुनिया, ग्वालियर। थाने का मालखाना…जहां आमतौर पर जंग लगे कट्टे, पिस्टल और धूल फांकती पीली पड़ चुकी फाइलें नजर आती हैं। शहर के प्रमुख थाने पड़ाव की इसी कालकोठरी में अंधेरे के बीच एक कोने में रखी चांदी की थालियां अपनी पहचान का इंतजार 31 साल से कर रही हैं।

चांदी की थालियां पुलिस के लिए भी पहेली ही हैं। 31 साल पहले 1995 में जब एक चोर से इन्हें जब्त किया गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था। चांदी की यह थालियां यहां अपना स्थाई पता बना लेंगी।

अब भी अपने मालिक का इंतजार कर रही हैं

इन 31 साल में थाने की रंगत बदल गई, नया भवन बदल गया, मालखाने में इन थालियों के सामने आए दूसरे सामानों को रिहाई मिल गई, लेकिन यह थालियां अब भी अपने मालिक का इंतजार कर रही हैं। इन थालियों को अब भी इस्तगासा नंबर से ही पहचाना जाता है।

असली मालिक तक थालियां पहुंचाने के प्रयास शुरू

हाल ही में जब थाने के मालखाना की सफाई शुरू हुई और मालखाने को अपडेट करने के प्रयास हुए। तब इन थालियों पर एएसपी अनु बेनीवाल की नजर पड़ी। उन्होंने अब इसके असली मालिक तक थालियां पहुंचाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं।

क्या है थालियों की कहानी

पड़ाव थाने के मालखाने में चांदी की पांच थालियां, एक चांदी की गिलास रखा हुआ है। इसकी पोटली पर इस्तगासा नंबर लिखा है। जिसमें जब्ती 1995 में लिखी है। चोर का नाम नहीं लिखा। तब से यह थालियां ऐसे ही पड़ी हैं। किसी ने प्रयास नहीं किया कि इनके असली मालिक को ढूंढकर उसे उसकी अमानत लौटाई जाए।

हाल ही में जब पुलिस अधिकारियों ने पीली पड़ चुकी फाइलों के बीच इन चमचमाती थालियों को देखा तो पड़ताल शुरू की। पड़ताल में सामने आया कि यह थालियां 1995 में एक चोर से जब्त हुई थी। चोर को किसी दूसरी चोरी में पकड़ा गया, उससे यह थालियां बरामद हुई। इसलिए इन थालियों पर अपराध नंबर अंकित नहीं है।

अब सिर्फ एक रास्ता, ग्राम क्राइम नोट बुक

पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि अब सिर्फ एक रास्ता थालियों के मालिक तक पहुंचने का है। ग्राम क्राइम नोट बुक में अपराध का सारा रिकार्ड होता है। इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। जिससे थालियों को असली मालिक तक पहुंचाया जा सके।

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कानूनी पेचीदगी

पुलिस बिना कोर्ट के आदेश और असली मालिक की पहचान के बिना इसकी नीलामी भी नहीं कर सकती। जानकारों का कहना है- यह तय हुए बिना सरकारी खजाने में भी जमा नहीं कराया जा सकता।



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