नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल में इस समय अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। शनिवार को ग्वालियर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हुई अचानक ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कटाई के इस “पीक सीजन” में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत और लागत पर पानी फेरने की स्थिति बना दी है।

हालांकि राहत की बात यह है कि अंचल में सरसों व चना आदि की फसल पहले ही कट चुकी है और 30 प्रतिशत गेहूं की फसल भी कटकर घरों तक पहुंच गई है। लेकिन खतरा अभी भी 70 फीसदी फसल पर बना हुआ है। जिले में 1.5 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई थी, जिसमें करीब 45 हजार हेक्टेयर की फसल कट चुकी है। अभी भी एक लाख पांच हजार हेक्टेयर में फसल खड़ी है।

घाटीगांव, चीनोर व भितरवार क्षेत्र में हुई वर्षा से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भीग गई है। इससे दाने काले पड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए किसान तेजी से कटाई में जुट गए हैं। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मुरार ग्रामीण में सीमित नुकसान, मुआवजे लायक नहीं

शनिवार को मुरार ग्रामीण के दांगियापुरा, बेनीपुरा, खेरा, जखारा व घुसगवां गांवों में भी ओलावृष्टि हुई। यहां राजस्व और कृषि विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार नुकसान पांच से 10 प्रतिशत के बीच है, जो मुआवजे की श्रेणी में नहीं आता। भू-राजस्व संहिता के अनुसार 25 प्रतिशत से कम नुकसान पर मुआवजा नहीं दिया जाता।

वर्षा से गुणवत्ता पर असर, सब्जियों को भी नुकसान

बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल भीग गई। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दानों की गुणवत्ता कमजोर हो सकती है और किसानों को कम कीमत मिल सकती है। सब्जी फसलों में भी नुकसान की सूचना है, हालांकि प्रशासन इसे मुआवजा योग्य नहीं मान रहा है।

अगले चार दिन भारी, फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आगामी चार दिन मौसम संवेदनशील रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। सात अप्रैल को नया सिस्टम सक्रिय होगा, जिसके बाद आठ और नौ अप्रैल को खतरा अधिक रहेगा।

प्रशासन अलर्ट, किसानों को दिए निर्देश

ओलावृष्टि के बाद प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर ने राजस्व, कृषि विभाग और मैदानी कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को किसानों के संपर्क में रहकर तत्काल स्थिति का आकलन करने को कहा गया है।

किसानों को सलाह: जल्द कटाई और सुरक्षित भंडारण

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह के अनुसार गेहूं की फसल पूरी तरह पक चुकी है। ओलावृष्टि से बालियां झड़ सकती हैं और वर्षा से दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि जल्द कटाई कर फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और तिरपाल से ढकने की व्यवस्था करें।

उप संचालक कृषि रनबीर जाटव के अनुसार फिलहाल व्यापक नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन 70 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी है, इसलिए सावधानी जरूरी है। भू-अभिलेख विभाग के अधीक्षक मुन्ना सिंह गुर्जर के अनुसार प्रारंभिक रिपोर्ट में नुकसान नहीं पाया गया है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

कहां कितनी हुई वर्षा

ग्वालियर: 31.6 मिमी

घाटीगांव: 8.1 मिमी

चीनोर: 9.1 मिमी

भितरवार: 1.1 मिमी

1.5 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल

45 हजार हेक्टेयर में कटाई पूरी

1.05 लाख हेक्टेयर में अभी खड़ी फसल

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