नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: जिला प्रशासन द्वारा सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। सोमवार को ग्राम केदारपुर में प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने दो स्थानों पर अभियान चलाकर 14 बिस्वा बेशकीमती शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। मुक्त कराई गई जमीन की अनुमानित कीमत लगभग चार करोड़ 88 लाख रुपये बताई गई है।
कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में एसडीएम झांसी रोड अतुल सिंह के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और नगर निगम अमला मौजूद रहा।
सर्वे क्रमांक 461 पर अतिक्रमण हटाया
एसडीएम झांसी रोड अतुल सिंह ने जानकारी दी कि ग्राम केदारपुर स्थित शासकीय सर्वे क्रमांक 461 की लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि पर संदीप शर्मा द्वारा सीमेंटेड बाउंड्री और पिलर बनाकर अतिक्रमण का प्रयास किया जा रहा था। प्रशासन ने मशीनों की सहायता से निर्माण हटवाते हुए जमीन को मुक्त कराया। इस भूमि की अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ 78 लाख रुपये आंकी गई है।
सर्वे क्रमांक 272/2 पर भी कार्रवाई
इसी तरह सर्वे क्रमांक 272/2 की शासकीय भूमि पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा गेट, बाउंड्री और अस्थायी गोदाम बनाकर अतिक्रमण किया गया था। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया। इस भूमि की अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ 10 लाख रुपये बताई गई है।
कार्रवाई के दौरान अपर तहसीलदार शिवदत्त कटारे सहित अन्य राजस्व अधिकारी, पुलिस बल और नगर निगम का अमला मौजूद रहा।
कलेक्ट्रेट के सामने अवैध निर्माण पर चुप्पी
जहां एक ओर प्रशासन सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए थ्रीडी मशीन चला रहा है, वहीं कलेक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित विद्या विहार कॉलोनी में हो रहे अवैध निर्माणों पर प्रशासन और नगर निगम की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
यह वही कॉलोनी है जिसका मामला न्यायालय में लंबित है। यहां पंजीयन विभाग रजिस्ट्री नहीं करता और प्रशासन की ओर से नामांतरण की प्रक्रिया भी बंद है। इसके बावजूद कॉलोनी में तेजी से मकान निर्माण, व्यावसायिक इमारतों का निर्माण और दुकानों का संचालन जारी है।
विद्या विहार: कानूनी विवाद का लंबा इतिहास
इस जमीन को लेकर गंगा प्रसाद शर्मा व अन्य ने सिविल दावा न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया था। वर्ष 2003 में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनके पक्ष में डिक्री पारित कर दी। दो वर्ष बाद शासन को इसकी जानकारी मिली और 2004 में अपर सत्र न्यायालय में सिविल अपील दायर की गई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि शासन ने अपील करने में विलंब किया। इसके बाद मप्र शासन और पीडब्ल्यूडी ने हाई कोर्ट में सेकंड अपील दायर की, जिसमें 800 दिन की देरी हुई। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी स्वीकार करते हुए अपर सत्र न्यायालय को गुण-दोष के आधार पर जमीन का मालिकाना हक पुनः तय करने का निर्देश दिया। इससे शासन को जमीन बचाने का अवसर मिला। दोबारा सुनवाई के बाद 12 सितंबर 2018 को जिला न्यायाधीश ने शासन की अपील खारिज कर दी। इसके बाद हाई कोर्ट में सेकंड अपील दायर की गई, जिसमें 2019 में डिक्री के आदेश पर रोक लगा दी गई।
निर्माण जारी, अनुमति नहीं
विद्या विहार कॉलोनी में बिना नगर निगम की अनुमति के लगातार निर्माण कार्य जारी हैं। बताया जा रहा है कि यहां जिन लोगों के मकान बन रहे हैं, वे या तो शासकीय सेवा में हैं या रसूखदार वर्ग से जुड़े हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब नगर निगम से निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही, तो फिर निर्माण कैसे हो रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई और चुप्पी के बीच यह विरोधाभास चर्चा का विषय बना हुआ है।
