क्या होता है टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन
एक विशेष औद्योगिक क्षेत्र या क्लस्टर होता है, जिसे विशेष रूप से दूरसंचार उपकरणों जैसे मोबाइल फोन, एंटेना, राउटर, फाइबर ऑप्टिक्स और 5जी उपकरण के निर्माण के लिए डिजाइन किया जाता है। इसे एक ऐसा “हब” समझ सकते हैं, जहां सरकार जमीन, बिजली, पानी और टैक्स में छूट जैसी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराती है, ताकि कंपनियां वहां अपनी फैक्ट्रियां लगा सकें।
ये हैं मुख्य विशेषताएं
1. इकोसिस्टम का निर्माण : यहां केवल मुख्य उत्पाद ही नहीं, बल्कि उसके छोटे पुर्जे बनाने वाली कंपनियां भी आसपास होती हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बचता है।
2. पीएलआइ स्कीम का लाभ : केंद्र सरकार “प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव” योजना के तहत यहां निवेश करने वाली कंपनियों को उनके उत्पादन के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन देती है।
3. बुनियादी ढांचा: यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतरीन लॉजिस्टिक्स यानी सड़क और रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाती है।
4. रोजगार : ऐसे जोन हजारों की संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।
इसलिए अधिक होगा महत्व
चीन पर निर्भरता कम करना: वर्तमान में हम कई टेलीकाम कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं। स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग जोन बनने से हम आत्मनिर्भर बनेंगे।
5जी रोलआउट: केंद्र में 5जी के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर उपकरणों की जरूरत है। ये जोन देश में ही सस्ते 5जी गियर बनाने में मदद करेंगे।
निर्यात बढ़ाना: सरकार का लक्ष्य प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है, ताकि हम यहां बने फोन और उपकरण दुनियाभर में भेज सकें।
योजनाओं में किए प्रविधान में स्पष्टता होनी चाहिए थी
डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर आफ कामर्स का कहना है कि राज्य बजट में किसी प्रकार का कोई नया करारोपण नहीं किए जाने का स्वागत है। बजट में कृषि, ग्रामीण विकास और उद्योगों के लिए संसाधन बढ़ाए जाने पर बल दिया गया है। इसमें व्यापारिक सुगमता, एमएसएमई को आसान ऋण और तकनीकी समर्थन व स्थानीय विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के प्रविधान पर और अधिक स्पष्टता होनी चाहिए थी, जो कि नहीं दिख रही है। चैंबर ने बजट में कर बोझ, जीएसटी, स्टांप ड्यूटी, मंडी शुल्क संबंधी राहतों पर विचार किए जाने की मांग की थी, परंतु कुछ नहीं हुआ।
समृद्ध प्रदेश के लिए सराहनीय, पर बाजारों की अनदेखी
भूपेन्द्र जैन, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, कैट का कहना है कि मध्यप्रदेश बजट 2026-27 को “समृद्ध मध्यप्रदेश” की दिशा में अच्छा कदम है, लेकिन व्यापारियों और बाजारों की अनदेखी चिंताजनक है। औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए 2500 करोड़ रुपये और निवेश के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रविधान स्वागत योग्य है, लेकिन प्रदेश के बाजारों के अधोसंरचना विकास, अतिक्रमण मुक्ति और तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए कोई विशेष फंड नहीं दिया गया है। बाजारों के बुनियादी ढांचे हेतु कम से कम 500 करोड़ का आवंटन आवश्यक था।
आएगा निवेश
आशीष पारेख, सीए का कहना है कि टेलीकाम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाने से ग्वालियर में निवेश आएगा। इससे नए रोजगार के अवसर विकसित होंगे। साथ ही आर्थिक तंत्र भी विकसित होगा। चूंकि बजट में छह हजार करोड़ के बजट का प्रविधान उद्योगों के लिए किया गया है, तो निश्चित तौर पर टेलीकाम जोन में इसका उपयोग होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार ने किसी तरह का नया टैक्स नहीं लगाया है। लेकिन बढ़ता राजस्व घाटा चिंता का विषय है। साथ ही विशेष रूप से रोलिंग बजट की अवधारणा एक सराहनीय कदम है, क्योंकि इससे आवंटित राशि के लैप्स होने का जोखिम खत्म हो जाएगा, जिससे फंड का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का 45 प्रतिशत योगदान है, जिसे देखते हुए किसानों के लिए 1.15 लाख करोड़ का आवंटन और सोलर पंप को प्रोत्साहन देना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
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