ग्वालियर के बिरला नगर सिविल अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं डॉक्टरों की अनुपस्थिति से प्रभावित हैं। मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है, ऊर्जा मंत्री प्र …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 04 Apr 2026 08:56:04 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Apr 2026 08:56:04 AM (IST)

ग्वालियर के बिरला नगर सिविल अस्पताल में डॉक्टर नहीं दे रहे सेवाएं, सिर्फ नर्सिंग स्टाफ के भरोसे इमरजेंसी
अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं कागजों तक सीमित। (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. बिरला नगर अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित
  2. डॉक्टरों की अनुपस्थिति से मरीजों को परेशानी बढ़ी
  3. नर्सिंग स्टाफ ही संभाल रहा इमरजेंसी कक्ष

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बिरला नगर सिविल अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। एक अप्रैल से इमरजेंसी सेवाओं को सुचारु करने के लिए डॉक्टरों का रोस्टर तैयार कर उन्हें ड्यूटी पर रहने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

अस्पताल के आकस्मिक उपचार केंद्र पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी कक्ष में केवल नर्सिंग स्टाफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ ही मौजूद रहते हैं, जबकि डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। ऐसे में गंभीर हालत में आने वाले मरीज समय पर इलाज मिलने से वंचित हैं।

सिविल अस्पताल से कई बार मरीजों को अस्पताल के गेट से ही वापस लौटना पड़ता है। मजबूरन मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल मुरार, सिविल अस्पताल हजीरा या जेएएच अस्पताल का रुख करना पड़ता है। इससे न सिर्फ मरीजों की परेशानी बढ़ रही है, बल्कि अन्य अस्पतालों पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

ऊर्जा मंत्री लेंगे बैठक

इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जल्द ही डॉक्टरों के साथ बैठक कर इस समस्या के समाधान पर चर्चा कर सकते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद इमरजेंसी सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

आपातकालीन ड्यूटी रोस्टर किया तैयार

आपातकालीन ड्यूटी रोस्टर तैयार किया गया है। नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर पहुंच रहा है। चिकित्सक नहीं आ रहे हैं। चिकित्सकों से चर्चा कर व्यवस्था को सुचारू करने के प्रयास किए जाएंगे। डॉ जेके मसोरिया, प्रभारी, सिविल अस्पताल बिरला नगर।

इमरजेंसी ड्यूटी से बचते डॉक्टर

चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की तैनाती होने के बावजूद वे इमरजेंसी ड्यूटी करने से बचते नजर आ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधीक्षक सिविल अस्पताल ने एक से 30 अप्रैल तक ड्यूटी रोस्टर तैयार कर सेवा शुरू करने के निर्देश दिए थे।



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